ये है डग्गामार बसों का हाल
रूट बसों की संख्या
मेरठ-गढ़-गजरौला-मुरादाबाद 63
मेरठ-मुजफ्फरनगर 26
मेरठ-कौशांबी 90
कुल बस 179
हर माह खुली लूट
आमतौर पर एक बस रोजाना औसतन 20 हजार रुपये की कमाई करती है। 179 डग्गामार बसों की कमाई पर नजर डालें तो यह कमाई 35.80 लाख रुपये रोजाना बैठती है। यानी महीने में कमाई का आंकड़ा 10 करोड़ 74 लाख तो सालाना करीब 129 करोड़ रुपये बैठता है। किसी विभाग की इतनी बड़ी कमाई लुट जाए तो उसका घाटे में जाना लाजिमी है।
रोडवेज रंग में रंगी डग्गामार
डग्गामार बस ऑपरेटरों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्होंने अपनी बसों को रोडवेज बसों के रंग में रंगवा दिया है। यही नहीं रोडवेज बसों पर लिखे स्लोगन से मिलते जुलते स्लोगन भी लिखवा रखे हैं, लेकिन तंत्र खामोश है। न तो इस पर परिवहन विभाग लगाम लगा रहा है और न ही पुलिस।
हमने रिपोर्ट भेज दी है
तीन रूटों पर दौड़ रही 179 बसों की उनके नंबर के साथ सर्वे लिस्ट तैयार कर परिवहन आयुक्त के अलावा जिला प्रशासन और आरटीओ को कार्रवाई करने की मांग के साथ भिजवा दी है। रोडवेज के साथ राष्ट्रीयकृत रूटों पर दौड़ रही ये बसे विभाग के राजस्व को चोट पहुंचा रही हैं।
- नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रोडवेज रीजन
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