मेरठ। सीसीएसयू द्वारा परीक्षा को लेकर अभी कोई तिथि घोषित नहीं की गई है। इसके बावजूद विरोध तेज हो गया है। इस बाबत राजनीतिक पार्टियां एवं छात्र संगठन रोजाना ज्ञापन भेज रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि वे 30 जून के बाद परीक्षाएं आयोजित करा सकते हैं। हालांकि अभी सीसीएसयू ने परीक्षा की तिथि के बारे में निर्णय नहीं किया है। इसके बावजूद विरोध शुरू हो गया है। रोजाना छात्र इसको लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दे रहे हैं। रालोद के प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान ने बुधवार को मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि तमाम प्रदेशों में कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर जुलाई में आयोजित होने वाली वार्षिक परीक्षा के बजाय इंटरनल असेसमेंट और पूर्व सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर रिजल्ट जारी करने की तैयारी है। वहीं, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा सरकार ने कोरोना के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए फाइनल ईयर के छात्रों की जुलाई को प्रस्तावित वार्षिक परीक्षा नहीं लेने का फैसला किया है। ऐसे में यहां भी परीक्षा कराए जाने की बजाय ऐसा ही किया जाए।
दो साल उम्र में छूट देने की मांग
भारतीय किसान यूनियन के छात्र नेताओं की तरफ से बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें कहा कि सभी छात्रों को प्रमोट किया जाए और प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में दो साल की आयु सीमा में बढ़ोतरी की जाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र से छात्र-छात्राएं शहर में आकर परीक्षा देंगे। इससे स्थिति बिगड़ सकती है। इस मौके पर छात्र नेता राजकुमार करनावल, जिला सचिव मनोज त्यागी ईकड़ी, कपिल मलिक, पंकज चौधरी, देवेंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।
65 फीसदी परीक्षाएं अटकीं
सीसीएसयू के कॉलेजों में 22 फरवरी से वार्षिक प्रणाली की परीक्षाएं शुरू हुईं थीं। लॉकडाउन होने के कारण 18 मार्च से आगे की सारी परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं। इनमें पौने चार लाख छात्र-छात्राएं शामिल हैं। ये परीक्षाएं पूरी होंगी तो इसके तुरंत बाद सेमेस्टर की परीक्षाएं हैं। इसमें डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं हैं। सबसे ज्यादा मामला फाइनल ईयर की परीक्षा पर फंसा है। जब तक ये नहीं होंगे तब तक वे दूसरे कोर्स में प्रवेश नहीं ले पाएंगे।