यह है तकनीक
एमआरआई एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है। इस चित्र के माध्यम से शरीर की काफी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है।
ये रेडिएशन के बजाय मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है, इसलिए एक्सरे और सीटी स्कैन से अलग है। शरीर के कौन से और कितने हिस्से की जांच करनी है। सामान्यता 20 मिनट से डेढ़ घंटा तक स्कैनिंग में लगता है।
सटीक जानकारी मिलती है
एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने में होता है। बीमारी की सटीक जानकारी लिए यह जांच होती है।
एमआरआई यूनिट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू की जाएगी। शासन स्तर से ही तय होना है कब और कौन इसे संचालित करेगा। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक