शहर ने 1987 के दंगे में का जो दंश झेला, उसे लोग आज तक नहीं भूले हैं। दंगे में दरकी भरोसे की दीवारें अब काफी हद तक भरती नजर आती हैं। लेकिन, उस दौरान कुछ नापाक इरादों वाले लोग ऐसा कर गए, जिसका दंश आज तक झेल रहे हैं।
वर्ष 1987 में हुए दंगे में पूरा शहर जल रहा था। दंगे की आग ऐसी भड़की थी कि पूरे देश ने उसकी तपिश महसूस की थी। इस दंगे में राजनेताओं ने ही नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने भी अपने हाथ सेंके थे। हाजी मस्तान ने जहां विवादित बयान देकर माहौल को और गरमाया था, तो उस समय उसके खास गुर्गे दाऊद इब्राहिम ने इसका जमकर फायदा उठाया।
दंगे की आग शांत होने पर अमन की तरफ लौटते शहर की चहल-पहल बीच 1987 में दाऊद मेरठ आया था। लालकुर्ती थाना के पास रहने वाली एक पूर्व फिल्म अभिनेत्री के घर दो दिन तक रुका था। अभिनेत्री के पुराने पड़ोसी इस बात को स्वीकार करते हैं। नाम न छापने पर उन्होंने स्वीकार किया कि दाऊद तब दो दिन यहां रहा था और शहर में घूमा था। उस समय वह इतना चर्चित नहीं था, इसलिए पुलिस उसे पहचान नहीं सकी।