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अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद ने हाशिमपुरा दंगों के दौरान मेरठ में गुजारे थे दो दिन, नहीं हो सकी थी पहचान

Mon, 05 Nov 2018 02:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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दाऊद इब्राहिम
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शहर ने 1987 के दंगे में का जो दंश झेला, उसे लोग आज तक नहीं भूले हैं। दंगे में दरकी भरोसे की दीवारें अब काफी हद तक भरती नजर आती हैं। लेकिन, उस दौरान कुछ नापाक इरादों वाले लोग ऐसा कर गए, जिसका दंश आज तक झेल रहे हैं।
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वर्ष 1987 में हुए दंगे में पूरा शहर जल रहा था। दंगे की आग ऐसी भड़की थी कि पूरे देश ने उसकी तपिश महसूस की थी। इस दंगे में राजनेताओं ने ही नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने भी अपने हाथ सेंके थे। हाजी मस्तान ने जहां विवादित बयान देकर माहौल को और गरमाया था, तो उस समय उसके खास गुर्गे दाऊद इब्राहिम ने इसका जमकर फायदा उठाया।

दंगे की आग शांत होने पर अमन की तरफ लौटते शहर की चहल-पहल बीच 1987 में दाऊद मेरठ आया था। लालकुर्ती थाना के पास रहने वाली एक पूर्व फिल्म अभिनेत्री के घर दो दिन तक रुका था। अभिनेत्री के पुराने पड़ोसी इस बात को स्वीकार करते हैं। नाम न छापने पर उन्होंने स्वीकार किया कि दाऊद तब दो दिन यहां रहा था और शहर में घूमा था। उस समय वह इतना चर्चित नहीं था, इसलिए पुलिस उसे पहचान नहीं सकी।
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दंगे के तुरंत बाद दाऊद का मेरठ में दो दिन रहना आज भी सवाल खड़े कर रहा है। लेकिन, इन सवालों के जवाब खुद सामने भी आ रहे हैं। मुंबई बम धमाकों से लेकर तमाम बड़ी घटनाओं के साथ आतंकी घटनाओं में भी मेरठ के तार जुड़े नजर आते हैं। जांच के दायरे में मेरठ हमेशा रहता है। ऐसे में साफ है कि दाऊद ने यहां रहकर अपना नेटवर्क तैयार किया और कुछ गुर्गे अपने साथ भी ले गया। 

1987 दंगें में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू संगठन पूरी तरह पीएसी के जवानों के पक्ष में उतर आए हैं। रविवार को शारदा रोड स्थित अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यालय पर महासभा के जिलाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने दंगे में मारे गए 172 हिंदुओं को भी याद किया। अभिषेक अग्रवाल ने पत्रकारों से कहा कि दंगे के दौरान हिंदुओं की हत्या की गयी। 172 हिंदुओं की हत्या का संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा पीएसी के निर्दोष जवानों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट जाएगी। पीएसी के जवानों को न्याय दिलाया जाएगा। अखिल भारत हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष पं. अशोक शर्मा ने कहा कि 1987 का दंगा उन्होंने देखा है। 14 अप्रैल को दंगे की शुरूआत गुलमर्ग सिनेमा से की गयी थी। जिसमें हिंदुओं को जला दिया गया था।

इस घटना ने हिंदू और मुसलमान के बीच दंगे का रूप ले लिया था। कुछ लोगों ने धार्मिक स्थलों से एलान करके दंगे को अधिक आग दी थी। दंगाइयों ने पीएल शर्मा अस्पताल में महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की थी। उपद्रवियों ने गरीबों के घर जलाए थे। उन्होंने कहा कि घटना दुर्भाग्य पूर्ण थी। पीएसी के जवानों ने जनता को सुरक्षा देने का काम किया था। ऐसी स्थिति में उन्हीं के खिलाफ निर्णय आया है। उन्होंने कहा कि दंगे की निष्पक्ष जांच के लिए महासभा शीघ्र ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेगी।
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