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तारीखें बदलने के साथ स्मार्ट कैंट की तस्वीर उम्मीदों के धरातल पर हुई धूमिल

Fri, 09 Dec 2016 11:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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छह माह पहले रक्षा मंत्रालय से कैंट बोर्ड को स्मार्ट कैंट बनाने की मंजूरी से उम्मीद जगी थी कि अब सब कुछ स्मार्ट होगा। 200 करोड़ से अधिक के इस प्रोजेक्ट से कैंट की कायापलट होने की उम्मीद जो थी। लेकिन तारीखें बदलने के साथ स्मार्ट कैंट की तस्वीर उम्मीदों के धरातल पर लगातार धूमिल होती गई। एक भी परियोजना ऐसी नहीं, जिस पर स्मार्ट कैंट का तमगा लगाकर अपनी उपलब्धि बताया जा सके। मलबों का ढेर, गंदगी का अंबार और अव्यवस्थाओं का आलम बड़ा और वाजिब सवाल पूछ रहा है कि आखिर कैंट कब स्मार्ट बनेगा।
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यह होनी थी कायापलट
स्मार्ट कैंट की परियोजनाओं में कैंट बोर्ड की सभी सरकारी इमारतों में सोलर पैनल लगने हैं। शुरूआत कैंट बोर्ड दफ्तर से ही हुई। स्ट्रीट लाइट में एलईडी और वाटर सप्लाई में जीआई पाइप लगने हैं। फुटपाथ मॉर्डन करते हुए वहां लाइटिंग के साथ उन्हें सोलर एनर्जी से चलाना है। कक्षा छह से ऊपर वाले छात्रों के लिए ई क्लास, वोकेशनल कोर्स शुरू होने, नई सड़कें, टायलेट बनाने, शिकायतों के लिए ऑनलाइन रिड्रेसल सिस्टम, ऑफिस में ऑटोमेशन, पार्क और बाग का आधुनिकीकरण होना है। वॉटर कूलर के अलावा मोबाइल नेटवर्क के लिए मूवेबल टावर लगाने आदि का भी काम किया जाना है।  

जहां था, वहीं है कैंट
कैंट बोर्ड ने इन छह माह में केवल प्लानिंग ही की। यहां तक कि बंगला नंबर 210 बी मॉल ध्वस्तीकरण का मलबा तक अभी तक नहीं उठवा पाया। जबकि बोर्ड बैठक में भी यह मामला उठा। अवैध निर्माण तो जैसे रिकॉर्ड बनाने जा रहे हों। अवैध निर्माणों की संख्या करीब 400 बताई जा रही है। बोर्ड अध्यक्ष जीओसी मेजर जनरल के. मनमीत सिंह भी अवैध निर्माण और गंदगी को लेकर कार्रवाई के लिए कह चुके हैं। अब जब मलबा नहीं हटा और वार्डों से गंदगी साफ नहीं हो रही तो ऐसे में कैंट कैसे स्मार्ट होगा। वार्डों से गंदगी की शिकायतों पर बोर्ड मेंबर मुंह मोड़े हुए हैं। कमांडर के निर्देश के बाद सफाई को लेकर अभियान शुरू किया गया।
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नया काम कोई पूरा नहीं
बोर्ड ने स्मार्ट कैंट को लेकर कुछ काम शुरू किए। लेकिन पूरा अभी एक भी नहीं हुआ है। नोटबंदी के बाद भुगतान को लेकर आ रही समस्या की वजह से काम मंद पड़ गए हैं। मरम्मत के काम हो रहे हैं। लेकिन स्मार्ट कैंट के लिए नए काम शुरू नहीं हुए। कैंट बोर्ड ने सोलर ऊर्जा के प्रयोग के लिए केवल अपने दफ्तर में पैनल लगवाए हैं। स्कूलों में सामान पहुंचा। लेकिन अभी काम शुरू नहीं हुआ। सड़कों के नाम पर तोपखाना में मरम्मत कार्य किया गया। मरम्मत का उद्घाटन कर उसे स्मार्ट कैंट का काम बताया। 1763 स्ट्रीट लाइटों पर एलईडी लगने का काम भी अधूरा है।

दो झटकों ने हिलाया कैंट बोर्ड
मॉल ध्वस्तीकरण में चार लोगों की मौत, सीईओ समेत छह अफसरों की नामजदगी, सीईई अनुज सिंह की गिरफ्तारी, जमानत पर छूटने, लेकिन बहाली न होना। साथ ही एक ही केस में सभी अफसर समान धाराओं में आरोपी। दूसरा झटका सीबीआई द्वारा सेनेटरी इंस्पेक्टर योगेश यादव की भर्ती में घूस लेने के आरोप में गिरफ्तारी। इन दोनों बड़े प्रकरणों से काफी दिन तक अधिकारी और कर्मचारी सहमे रहे। जिनसे बोर्ड का कामकाज बाधित हुआ।

जल्द देखने को मिलेगा रिजल्ट
स्मार्ट कैंट में कई परियोजनाएं शामिल हैं। कुछ पर काम शुरू हो गया है। हाल में बोर्ड ने स्मार्ट कैंट का लोगो जारी किया है। स्मार्ट कैंट प्रोजेक्ट से जुड़े जो भी काम होंगे, उन पर वह लोगो लगाया जाएगा। पिछले दिनों घटनाओं का असर काम पर पड़ा। अब काम में तेजी लाई जा रही है। जल्द ही इसका रिजल्ट देखने को मिलेगा। - एमए जफर, प्रवक्ता, कैंट बोर्ड

नोटबंदी से काम स्लो
बोर्ड बैठक में स्मार्ट कैंट को लेकर कई प्रस्ताव पास हुए हैं। 25 लाख रुपये टाइल्स के लिए और सड़क के लिए करीब सवा दो करोड़ रुपये पास हुए हैं। वाटर एटीएम तैयार हैं। काम हो रहा है। नोटबंदी की वजह से काम स्लो हुआ है। नए साल तक काफी काम होने की उम्मीद है।- बीना वाधवा, उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड
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