मेरठ। सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर गांव में बसी अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त कर मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इसे लेकर संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति और उल्देपुर के ग्रामीणों में आक्रोश है। शनिवार को समिति के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात कर कॉलोनियों में बने घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई रोकने की मांग की। डीएम ने कहा कि इस मामले का आंदोलन से नहीं, कानूनी प्रक्रिया से ही समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है।
संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में नौ लोगों का प्रतिनिधिमंडल शनिवार दोपहर तीन बजे डीएम से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उल्देपुर में कॉलोनियां ध्वस्त नहीं करने की मांग की। ग्रामीण सुरेश पाल ने बताया कि उन्होंने एक कॉलोनी में प्लॉट खरीदकर मकान बनाया था। प्राधिकरण की टीम ने मकान पर बुलडोजर चला दिया। उस समय मकान में उनकी बीमार पत्नी मौजूद थी। लोगों ने बताया कि ऐसी कई अन्य कॉलोनियों में भी प्राधिकरण की ओर से बुलडोजर चलाने की बात कही जा रही है।
लोगों ने डीएम से कहा कि वे बुलडोजर नहीं चलने देंगे। इसके लिए उन्हें बड़ा आंदोलन क्यों न करना पड़े। इस पर डीएम ने लोगों को समझाया कि आंदोलन से काम नहीं चलेगा और कानूनी प्रक्रिया से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना ही है। जिसे भी आपत्ति है, वह कोर्ट जा सकता है।
दो महीने तक कार्रवाई नहीं होने का आश्वासन देने का दावा
करीब 30 मिनट तक चली वार्ता में कोई खास समाधान नहीं निकला। हालांकि समिति अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने बताया कि डीएम ने उन्हें आश्वासन दिया है कि दो महीने तक बुलडोजर की कार्रवाई नहीं होगी। उनके आश्वासन पर लोग मान गए।
समिति ने भी स्पष्ट किया कि अगर प्राधिकरण का बुलडोजर उल्देपुर गांव में पहुंचा तो आंदोलन किया जाएगा। पहले कानूनी प्रक्रिया और फिर आंदोलन के जरिए बुलडोजर को रोकने की बात कही गई। रविंद्र गुर्जर ने कहा कि मेरठ में किसी का मकान नहीं तोड़ने देंगे। इसके लिए समिति के लोगों को अनिश्चितकालीन धरने पर भी बैठना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे।
मुलाकात करने वालों में पूर्व जिला पंचायत सदस्य बाबूराम जाटव, शीतल चौहान, उपेंद्र प्रधान, ओमप्रकाश, तरुण गोयल, कवलजीत सिंह और अशोक डागर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। वार्ता के दौरान डीएम के साथ एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति, मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना, एडीएम सिटी बृजेश सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है मामला
21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उल्देपुर में बसी अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। इसके बाद संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति, कॉलोनी बनाने वाले लोगों और वहां संपत्ति खरीदने वालों ने शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन किया था। एडीएम सिटी बृजेश सिंह और एसपी सिटी विनायक गोपाल मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया था कि उनकी मुलाकात डीएम से कराई जाएगी। इस आश्वासन पर लोगों ने नौ घंटे बाद धरना समाप्त किया था। शनिवार को डीएम से मुलाकात हुई। इसमें लोगों ने अपनी समस्याएं बताईं। डीएम ने उनकी समस्याएं सुनने के बाद शासन को अवगत कराने का भरोसा दिया।