जेल में बंद पिता और चाचा को न्याय दिलाने के लिए दर-दर भटक रहीं दो सगी बहनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। आरोप है कि पुलिस ने उनके पिता व चाचा को झूठे मामले में जेल भिजवा दिया। वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुकी हैं। समाज उन्हें अपराधियों की नजर से देखने लगा है।
बेगमबाग निवासी दिशा और हर्षिता मंगा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में आरोप लगाते हुए बताया कि कुछ समय पहले लालकुर्ती थाने में एक करोड़ के सोने की हेराफेरी के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने बिना किसी ठोस सुबूत के उनके पिता विशाल मंगा और चाचा को अभियुक्त बनाकर जेल भेज दिया। पुलिस ने प्रकरण में साक्ष्य के तौर पर स्टांप पेपर शामिल किए। लेकिन वह नोटरी नहीं हैं। साथ ही उन्हें खरीदने वाले भी कोई और हैं। इस मामले में लालकुर्ती थाने के एक तत्कालीन दरोगा की भूमिका संदिग्ध रही। वह समय-समय पर घर आकर परिवारजनों पर तीन लाख रुपये देने का दबाव बनाता। ऐसा न करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देता। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ने जब दरोगा की मांग पूरी नहीं की तो उसने मनमानी करते हुए झूठा बरामदगी दिखाकर उनके पिता को अपराधी बना डाला। तब से उनके पिता व चाचा जेल में ही हैं। दोनों बहनों के अनुसार पूरा परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। फीस न दे पाने के कारण उनकी पढ़ाई रुक गई है। उन्होंने प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराने अथवा दोनों बहनों को इच्छा मृत्यु की अनुमति दिए जाने की मांग की है।
एसएसपी को सौंपा प्रार्थनापत्र
दोनों बहनें एसएसपी नितिन तिवारी से भी उनके कार्यालय में मिलीं। प्रार्थनापत्र सौंपकर एसएसपी को प्रकरण की जानकारी दी। कहा कि अगर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। यही नहीं तत्कालीन जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने एसएसपी से उनके निर्दोष पिता और चाचा को जेल से बाहर निकलवाने की गुहार लगाई है। एसएसपी ने दोनों बहनों को निष्पक्ष जांच कराने और न्यायोचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।