दो डॉक्टरों के सहारे दो लाख की आबादी
हस्तिनापुर। कस्बे की करीब दो लाख की आबादी का उपचार सीएचसी पर तैनात सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे है। इसके अलावा एएनएम के 11 पद, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर और बीसीपीएम के पद भी रिक्त पड़े हैं। ऐसे में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी से अधिकतर मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। लोगों की मांग के बाद भी यहां डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। कोविड के दौरान यहां संसाधनों तो मुहैया कराए गए, लेकिन स्टाफ नहीं तैनात किया गया। हाल में कोरोना की आहट के बाद फिर से लोग डरे हुए हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों की तैनाती पर ध्यान नहीं दिया। सीएचसी में महिला डॉक्टर की आज तक तैनाती नहीं की गई। सीएचसी से एक महिला विशेषज्ञ को अटैच किया गया है, लेकिन वह जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में जच्चा-बच्चा को भी उपचार नहीं मिल पा रहा है।
कंपाउंडर के सहारे कोविड वार्ड
कोरोना महामारी के बाद सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। 10 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया। लेकिन स्टाफ की कमी के कारण यह वार्ड कंपाउंडर के सहारे है। कोविड काल में तैनात किए गए डॉक्टर इधर-उधर शिफ्ट कर दिए गए। अब यहां पर डॉक्टर, नर्स व तकनीशियन की कमी है। दिशा निर्देश के अनुसार 10 बेड का आईसीयू संचालित करने के लिए कम से कम 8 डॉक्टर होने चाहिए। जबकि एक ही स्थायी डॉक्टर है।
स्टाफ मांगा गया है
सीएचसी पर स्टाफ की कमी है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उन्हाेंने जल्द डॉक्टरों की तैनाती का आश्वासन दिया है।
डॉ. राहुल वर्मा, सीएचसी प्रभारी