दोनों घोड़ों की मौत से मालिकों के परिवार में गम का माहौल है। डॉ. जयवीर सिंह का कहना है कि दोनों घोड़ों में भयंकर बीमारी थी, रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें मारा गया है। इसका मुआवजा भी दिलाया जाएगा।
एक की आठ साल तो दूसरे की उम्र तीन वर्ष
भराला के अनिल ने बताया कि उसके पास उक्त घोड़ा आठ साल था। वहीं, मुन्नु के पास घोड़ा तीन साल से था। इनसे ही दोनों परिवारों का पालन-पोषण हो रहा था। अनिल ने बताया कि उसके घोड़े ने आज भी काम किया।
धनराशि देने का है प्रावधान
यदि किसी घोड़े को ग्लैंडर्स बीमारी हो जाती है तो उसे नियमानुसार मारकर दबाया जाता है। ऐसा नहीं करने से पशुओं के अतिरिक्त मनुष्य को भी संक्रमण का खतरा रहता है। अनिल एवं मुन्नु को 25-25 हजार रुपये दिए जाएंगे।
प्रधान ने किया विरोध
दोनों घोड़ों को मारने की सूचना पाकर ग्राम प्रधान उपेंद्र भराला मौके पर पहुंच गए। उनका कहना है कि घोड़ों के मालिकों को उचित मुआवजे की जानकारी लिखित में देनी चाहिए। जिस पर चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए। ग्राम प्रधान ने चीफ वेटनरी ऑफिसर से फोन पर वार्ता कर मुआवजे की मांग की।