फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: दो घोड़ों को दे दिया मौत का इंजेक्शन, इस वजह से ली जान, वजह कर देगी हैरान

Sat, 17 Nov 2018 10:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
यूपी के मेरठ से सटे एक गांव में दो मजदूरों के घोड़ों को चिकित्सकों की टीम ने शुक्र्रवार को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद उन्हें जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर दबा दिया। घोड़ों की मौत पर जहां दो परिवारों में गम का माहौल है वही ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान के साथ मिलकर इसका विरोध भी किया। आइए जानते हैं आखिर क्यों घोड़ों को दिया गया मौत का इंजेक्शन:-
विज्ञापन

 
मोदीपुरम के भराला गांव निवासी अनिल पुत्र प्रकाश और मुन्नु पुत्र जगपाल चाचा-भतीजे हैं। ये भट्ठे पर घोड़ा-तांगा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दोनों घोड़ों में ग्लैडर्स की बाबत दौराला पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने सैंपल हिसार स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर इंस्टीट्यूट में भेजे थे। वहां से रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके अतिरिक्त दूसरी बार भी जांच में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई।

इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने दोनों घोड़ों के मालिकों और चीफ वेटनरी ऑफिसर को इसकी जानकारी दी। दौराला के पशु चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर कमल सिंह, ब्रुक टीम के डॉ. जयवीर सिंह, डॉ. रजनीश सिंह आदि टीम के साथ सिवाया टोल प्लाजा के समीप पहुंचे और जेसीबी से गड्ढा खुदवाया। वहां पर अनिल और मुन्नू घोड़े लेकर पहुंचे। उन्हें इंजेक्शन देकर मार देने के बाद नमक डालकर गड्ढे में दबा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों घोड़ों की मौत से मालिकों के परिवार में गम का माहौल है। डॉ. जयवीर सिंह का कहना है कि दोनों घोड़ों में भयंकर बीमारी थी, रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें मारा गया है। इसका मुआवजा भी दिलाया जाएगा।

एक की आठ साल तो दूसरे की उम्र तीन वर्ष
भराला के अनिल ने बताया कि उसके पास उक्त घोड़ा आठ साल था। वहीं, मुन्नु के पास घोड़ा तीन साल से था। इनसे ही दोनों परिवारों का पालन-पोषण हो रहा था। अनिल ने बताया कि उसके घोड़े ने आज भी काम किया। 

धनराशि देने का है प्रावधान  
यदि किसी घोड़े को ग्लैंडर्स बीमारी हो जाती है तो उसे नियमानुसार मारकर दबाया जाता है। ऐसा नहीं करने से पशुओं के अतिरिक्त मनुष्य को भी संक्रमण का खतरा रहता है। अनिल एवं मुन्नु को 25-25 हजार रुपये दिए जाएंगे।

प्रधान ने किया विरोध  
दोनों घोड़ों को मारने की सूचना पाकर ग्राम प्रधान उपेंद्र भराला मौके पर पहुंच गए। उनका कहना है कि घोड़ों के मालिकों को उचित मुआवजे की जानकारी लिखित में देनी चाहिए। जिस पर चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए। ग्राम प्रधान ने चीफ वेटनरी ऑफिसर से फोन पर वार्ता कर मुआवजे की मांग की। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें