फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाकर किया हंगामा, दोनों पक्ष थाने पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। मेरठ-करनाल हाईवे स्थित दबथुआ गांव में बुधवार को चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। चकबंदी विभाग के अधिकारियों और पटवारी के गांव पहुंचने के बाद दोनों पक्षों में काफी देर तक जद्दोजहद चली। ग्रामीणों के मत के आधार पर चकबंदी कराने या न कराने पर सहमति बनाने का प्रयास किया गया।
इसके बाद चकबंदी के समर्थन में किसानों के हस्ताक्षर कराए जाने लगे। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने मृत ग्रामीणों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद हाथापाई शुरू हो गई। पुलिस ने सख्ती दिखाकर मामला शांत कराया। बाद में दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, पांच अगस्त को दबथुआ गांव में हुई पंचायत में ग्रामीणों ने चकबंदी का विरोध किया था। बुधवार को चकबंदी प्रक्रिया को लेकर एसीओ लक्ष्मी रानी और पटवारी अनिल चौधरी पुलिस के साथ गांव पहुंचे। अधिकारियों के पहुंचने के बाद चकबंदी के पक्ष और विरोध में ग्रामीणों के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। काफी देर चली चर्चा के बाद ग्रामीणों के मत के आधार पर चकबंदी कराने या न कराने का निर्णय लेने की बात तय हुई। इसके बाद चकबंदी के समर्थन में किसानों से हस्ताक्षर कराने शुरू किए गए। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि कुछ मृत ग्रामीणों के नाम पर फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं।
आरोप को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई शुरू हो गई। पुलिसकर्मियों ने सख्ती कर दोनों पक्षों को अलग किया और मामला शांत कराया।
हंगामे के बाद अनिल पक्ष के लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर सरधना थाने पहुंचे। कुछ देर बाद दूसरा पक्ष भी थाने पहुंच गया। अनिल पक्ष की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया कि गांव में पिछले करीब दो वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। विरोध के बावजूद लेखपाल ने पंचायत बुला ली। आरोप है कि इस दौरान लेखपाल ने मारपीट और गाली-गलौज की। तहरीर में लेखपाल पर ग्रामीणों से रुपये मांगने का भी आरोप लगाया गया है। दूसरे पक्ष के लोगों ने भी अपने साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। एसीओ चकबंदी लक्ष्मी रानी और लेखपाल अनिल चौधरी थाने में मौजूद रहे। उन्होंने ग्रामीणों से किसी भी प्रकार के रुपये लिए जाने के आरोप को निराधार बताया। सीओ आशुतोष कुमार का कहना है कि पुलिस ने दोनों पक्षों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।