मेरठ। रोहटा गांव में 11 साल पुराने नरेंद्र हत्याकांड में अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रहलाद सिंह द्वितीय ने आरोपी बंटी और मोनू को दोषी करार दिया। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 21-21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
थाना सरूरपुर में 25 मार्च 2014 को रोहटा निवासी बिरजू ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसके पुत्र नरेंद्र उर्फ भोपत ने गांव में मोनू नाई की दुकान में काम सीखा था। इसके बाद मोनू की दुकान के सामने अपनी दुकान खोल ली थी। नरेंद्र की दुकान काफी चलने लगी और मोनू की दुकान ठप होने लगी। इसे लेकर नरेंद्र से मोनू रंजिश रखने लगा। आरोप है कि उसने कई बार नरेंद्र को धमकी दी थी, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 25 मार्च 2014 की रात 8:30 बजे मोनू और बंटी उसके लड़के को घर से बुलाकर ले गए। घर से कुछ दूर नरेंद्र को तमंचे से पेट में गोली मार दी और मौके से भाग गए। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखकर आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया।
हत्या के मामले में दो आरोपी दोषमुक्त
मेरठ। अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट-2 पवन कुमार शुक्ला ने हत्या के मामले में दो आरोपियों कुलदीप चिकारा और सोनू उर्फ सचिन निवासी ग्राम खानपुर को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।
रोहटा रोड निवासी सतबीर सिंह ने 3 अक्तूबर 2014 को थाना जानी में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पुत्र नितिन को आरोपी कुलदीप घर से बुलाकर ले गया था। अगले दिन उसके पुत्र नितिन का शव खानपुर के जंगल में मिली। नितिन के गले में बेल्ट बंधी हुई थी। शव के पास शराब की बोतलें भी बरामद हुई थी। किसी ने पीटकर उसके बेटे की हत्या कर दी। नितिन की आरोपियों से किसी बात को लेकर पुरानी रंजिश थी। न्यायालय में आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता ने निर्दोष होने के साक्ष्य न्यायालय में पेश किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया।
अपर नगर आयुक्त से मारपीट के आरोप में सांसद राजकुमार सांगवान दोषमुक्त
मेरठ। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए नदीम अनवर ने 22 साल पुराने अपर नगर आयुक्त से मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में आरोपी सांसद राजकुमार सांगवान को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त किया।
सांसद के अधिवक्ता ने बताया कि दिनांक 29 मई 2003 को शमशाद ने थाना सिविल लाइन मेरठ में मुकदमा पंजीकृत कराया था। इसमें बताया था कि वह तत्कालीन अपर नगर आयुक्त जीएन शुक्ला के साथ घर से कार्यालय के लिए सरकारी वाहन से जा रहा था। तभी घर के गेट पर बाहर ही राजकुमार सांगवान ने अपने अन्य साथियों के साथ उनका वाहन रोक लिया। आरोपी ने अपर नगर आयुक्त को गाड़ी से उतारते हुए उनके हाथ से पत्रावलियां लेकर सड़क पर फेंक दी और मौजूद लोगों ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। कारण पूछने पर बताया कि उन्होंने चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर मूर्ति की सफाई नहीं कराई और न ही उनका माल्यार्पण किया गया है। इस मामले में आरोपी की ओर से उनके अधिवक्ता ने निर्दोष होने के साक्ष्य न्यायालय में पेश किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।