श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री शांतिनाथ विधान का 31वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 31वें दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वेदी पर विराजमान त्रय तीर्थंकरों के जलाभिषेक के साथ हुआ। मुनि 108 भाव भूषण महाराज ने कहा कि संतोष करने पर ही सच्चा सुख मिलता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार सुख और दुख की प्राप्ति होती है। आत्मा स्वभाव से शुद्ध एवं ज्ञानमयी है, लेकिन संसार के मोह-माया में उलझकर वह अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि अपने कर्मों और उपलब्ध संसाधनों में संतोष रखना सीख ले तो उसके जीवन में शांति का संचार होता है।
शनिवार को श्रद्धालुओं ने त्रिमूर्ति जिनालय में पहुंचकर विधान की मांगलिक क्रियाओं में दिग्बंधन, पात्र शुद्धि, जल शुद्धि एवं सकलीकरण आदि कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। विधान के दौरान शांतिधारा की बोली लगाई गई, जिसमें मुदित जैन, सतेंद्र जैन, पारस जैन एवं हर्षित जैन को शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्रीय अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, अजीत प्रसाद जैन, राजीव जैन, सुशील जैन, महाप्रबंधक उमेश जैन, अतुल जैन सहित अन्य पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।
शांतिनाथ की आराधना कर 120 अर्घ्य समर्पित किए
विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने नित्य नियम पूजन कर भगवान शांतिनाथ की आराधना की तथा 120 अर्घ्य मंडप पर समर्पित किए। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। सायंकालीन बेला में संगीतमय आरती, भक्ति कार्यक्रम तथा धार्मिक प्रश्नमंच का आयोजन किया गया। विधान में शामिल महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भजनों और धार्मिक गीतों पर भक्ति प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद