उन्होंने मेरठ को लेकर कहा कि मेरठ मेरा घर है और यहां से मेरा पुराना नाता है। यहां मेरी ससुराल है। यहां की खुशबू, यहां का खाना और मेहमान नवाजी मुझे पसंद है। उन्होंने कहा कि जब अपने शुरूआती दिनों में कानपुर या अन्य जिलों में ट्रायल या क्रिकेट खेलने जाते तो यहीं मेरठ सिटी स्टेशन से ही ट्रेन पकड़ते थे। मेरठ से पुरानी यादें जुड़ी हैं। यहां से कई क्रिकेटर भारतीय टीम में भी शामिल हो चुके हैं। यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं हैं।
मैदान में बैट लेकर पहुंचे नन्हें क्रिकेटर
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उन्होंने कहा कि एलएससीटेन-10 बच्चों के लिए बहुत अच्छा अवसर है। अमर उजाला का यह सराहनीय प्रयास है। युवा क्रिकेटर इसमें अलग तरीके से अपना कॅरियर बना सकते हैं। जो बच्चे पहले जिन खिलाड़ियों को टीवी पर देखते थे इस लीग के माध्यम से युवाओं को उन खिलाड़ियों से मिलने और उनके क्रिकेट सीखने का अवसर प्राप्त होगा। उन खिलाड़ियों से युवा बात कर सकेंगे और किस प्रकार बड़े खिलाड़ी दबाव को झेलते हैं और अपने खेल का प्रदर्शन करते हैं वह सीखने का भी मौका मिलेगा।
दो-दो रुपये इक्टठा कर खरीदते थे गेंद
सुरेश रैना ने कहा कि उन्होंने भी टेनिस बाल से क्रिकेट खेना शुरू किया था। पहले गेंद और अन्य खेल उपकरण काफी महंगे थे। दो-दो रुपये इक्टठा कर गेंद खरीदते थे और क्रिकेट खेलते थे। टेनिस बाल से भी अच्छे से खिलाड़ी अभ्यास कर सकते हैं। उन्होंने ट्रायल देने आए युवा क्रिकेटरों को भी टिप्स दिए कि अधिक से अधिक क्रिकेट खेलें और मजे लेकर खेलें और इसमें अपना कॅरियर बनाएं।