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स्टीमर से होती यात्रा तो खुल जाती अफसरों की पोल

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स्टीमर से होती यात्रा तो खुल जाती अफसरों की पोल
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बिजनौर। गंगा यात्रा कार्यक्रम सड़क मार्ग से होने पर गंगा नदी की जमीन पर हुए अवैध कब्जे सीएम की नजरों तक नहीं आ सके। जबकि गंगा की कई सौ बीघा जमीन पर अवैध कब्जे कर फसलें बोई जा रही हैं। यदि यात्रा स्टीमर से होती, तो सारी पोल खुल सकती थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गंगा बैराज से गंगा यात्रा का शुभारंभ किया। प्रशासन कई दिन से गंगा यात्रा की तैयारी में जुटा था। मुख्यमंत्री को बिजनौर से गंगा के रास्ते स्टीमर से हस्तिनापुर जाना था। गंगा के रास्ते हस्तिनापुर 20 किलोमीटर से ज्यादा है। कार्यक्रम से दो दिन पूर्व एनडीआरएफ की टीम ने भी गंगा के रास्ते का निरीक्षण किया और कई जगह गंगा में पानी कम पाया। जहां पानी कम था, वहां पानी छोड़ने को कहा गया।
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सूत्रों के मुताबिक गंगा की कई सौ बीघा जमीन पर मिलीभगत से कब्जा है और फसलें खड़ी हैं। अफसरों को डर था कि अगर यात्रा के दौरान सीएम की नजर अवैध कब्जों पर पड़ गई, तो मुश्किल हो जाएगी। लिहाजा स्टीमर से गंगा के रास्ते जाना ठीक नहीं बता दिया गया। इसके बाद सड़क के रास्ते ही मुख्यमंत्री को हस्तिनापुर ले जाने का प्लान बनाया गया और रामराज में सभा का आयोजन भी रखा गया।
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हंगामा करने की साजिश पर जांच
गंगा बैराज पर सीएम की सभा के दौरान कहीं साजिश के तहत तो रामपुर ठकरा के लोगों से हंगामा तो नहीं कराया गया। इसकी गोपनीय तरीके से जांच शुरू हो गई है। रामपुर ठकरा के लोग किसके कहने पर आए, उन्हें किन लोगों ने उकसाया, यह तमाम बातें जांच के घेरे में हैं। कुछ भाजपा नेता भी रामपुर ठकरा के लोगों की इस हरकत से नाराज हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि रामपुर ठकरा के लोगों को लाने में सत्ता दल के ही कुछ लोगों का तो हाथ नहीं है।
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