सेंट्रल मार्केट में देर शाम धरने पर पहुंचे सपा विधायक अतुल प्रधान व्यापारियों को संबोधित करते ह
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शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण को लेकर व्यापारियों की नींदें उड़ी हुई हैं। शनिवार को मेन सेंट्रल मार्केट बाजार बंद कर व्यापारी धरने पर बैठे। वहीं सुबह बाजार बंद कराने को लेकर व्यापारी दो फाड़ हो गए। तिरंगा व्यापार संघ की ओर से बाजार बंद का विरोध करते हुए दुकानें खोली गईं। बाजार में व्यावसायिक भूखंडों में बनी अधिकांश दुकानें दोपहर बाद खुल गईं। बाजार में 73 दुकानों के शटर हटाकर दीवार और गेट लगा दिए गए हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को आवास विकास की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके लिए ध्वस्तीकरण का टेंडर लेने वाली कंपनी को निर्देश दिए गए हैं। सरधना विधायक अतुल प्रधान भी व्यापारियों के बीच पहुंचे और भाजपा पर कटाक्ष किया। कहा कि सपा ने राहत दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 सप्ताह के भीतर ध्वस्तीकरण के सख्त आदेश दिए हैं। इस जद में 1468 निर्माण आ रहे हैं जो मूल रूप से आवासीय हैं लेकिन वर्तमान में वहां शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं। यह मियाद अब पूरी हो रही है। मामले में आवास एवं विकास परिषद को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है। मामले में 13 मार्च को सुनवाई संभव है। इससे पहले ही रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। विभाग की ओर से अवैध निर्माण खुद हटाने के लिए व्यापारियों से कहा गया है। इसके लिए 15 दिन का समय देते हुए नोटिस चस्पा किए गए थे।
पूरे बाजार में हटाया जा रहा अतिक्रमण
शनिवार को पूरा मेन सेंट्रल मार्केट बाजार सूना रहा। व्यावसायिक भूखंडों पर बनी दुकानें दोपहर बाद खुलीं, लेकिन खरीदार नदारद रहे। अरोड़ा गारमेंट्स के सामने ही खाली स्थान पर कुर्सी लगाकर धरने पर व्यापारी बैठे रहे। पूरे बाजार में श्रमिक लगाकर दुकानों के बोर्ड, स्ट्रक्चर आदि हटाने का काम किया जाता रहा। भीतरी इलाकों में खोली गई दुकानों को भी शटर हटाकर बंद किया जाता रहा। बाजार में 73 दुकानों को बंद कर दीवार और गेट लगा दिए गए हैं। इनमें तमाम दुकानदारों की ओर से आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि न करने को लेकर भी शपथ पत्र दिए जा रहे हैं।
मांगा गया फोर्स, कंपनी को दिए निर्देश
सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के लिए पिछले साल द रिलायबल कंपनी को 85 लाख रुपये में 661/6 व 31 अन्य व्यावसायिक भूखंडों में किए गए निर्माण के ध्वस्तीकरण का ठेका दिया गया था। बीते साल 25 व 26 अक्तूबर को 661/6 का ध्वस्तीकरण हो गया। अब विभाग की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए जिला प्रशासन से फोर्स मांगा गया है। इसी के साथ कंपनी को मशीनें लेकर आने को निर्देश दिए गए हैं। उधर, नई शमन नीति से भी सभी व्यापारियों को राहत मिलने आसान नहीं दिख रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना द्वारा आईजीआरएस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनुपालन की स्थिति को लेकर की गई शिकायत पर विभाग ने जवाब दिया कि व्यापारियों से कोई आवेदन नहीं मांगा गया। वे स्वेच्छा से आवेदन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है।