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Meerut News: व्यापारियों ने दी 150 पन्नों की तहरीर, जिला कोषागार तक जांच पहुंची

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स्टांप घोटाले के आरोपी वकील विशाल वर्मा की गिरफ्तारी की मांग
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। स्टांप घोटाले के मुख्य आरोपी वकील विशाल वर्मा की घेराबंदी करने के लिए व्यापारियों का आक्रोश बरकरार है। सोमवार को मेरठ व्यापार मंडल ने 150 पन्नों की तहरीर जिलाधिकारी को सौंप दी। व्यापारियों ने विशाल वर्मा की गिरफ्तारी की मांग की। डीएम ने आश्वासन दिया था कि मुकदमा लिखा जाएगा और आरोपी भी जेल जाएगा। वहीं, घोटालेे की जांच जिला कोषागार तक पहुंच गई है।

997 फर्जी स्टांप की पुष्टि होने पर पांच साल यानी 2016 से रजिस्ट्री की जांच शुरू हो गई है। सहायक आयुक्त स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने छह उपनिबंधकों को पत्राचार कर दिया है। पांच मुकदमों में विशाल वर्मा को नामजद किया गया है। जिसको पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है। शनिवार को डीएम की मेरठ व्यापार मंडल के अध्यक्ष जीतू नागपाल और महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा सहित 100 से अधिक व्यापारियों की बैठक हुई थी। जिसमें डीएम दीपक मीणा ने एक मुकदमा दर्ज कराने की बात कही और सभी पीड़ित का नाम तहरीर में खोला जाए।
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मेरठ व्यापार मंडल के नेतृत्व में व्यापारी और पीड़ितों ने सोमवार शाम 150 पन्नों की संयुक्त एक तहरीर डीएम को सौंपी। जिसमें विशाल वर्मा की गिरफ्तारी, संपत्ति और पासपोर्ट जब्त करने की मांग की। डीएम ने एसएसपी से बातचीत कर जल्द मुकदमा दर्ज कराने का आश्वासन दिया। पुलिस ही आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करेगी। पुलिस को पूर्व में दर्ज मुकदमे में भी कार्रवाई करनी होगी।
डीएम के आश्वासन के बाद वह वापस लौटे। डीएम को तहरीर देने में जीतू नागपाल और शैंकी वर्मा के साथ मनीष कपूर, संजीव अग्रवाल, राकेश सैनी और अश्वनी भारद्वाज समेत अन्य पीड़ित व्यापारी और लोग मौजूद रहे।

फर्जी स्टांप पर कोषागार का सीरियल नंबर, उठे सवाल
फर्जी स्टांप पर जिला कोषागार में रखे स्टांप सीरियल नंबर मिला है। सीरियल नंबर किसने बताया, कोषागार की मुहर और हस्ताक्षर किसने किए हैं। जिला कोषागार ने अपनी रिपोर्ट में मुहर और हस्ताक्षर फर्जी बता दिए। इस प्रकरण में जिला कोषागार कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी स्टांप आरोपी विशाल ने कहां से लिए, इसकी गहनता से जांच हो रही है। विशाल की गिरफ्तारी के बाद ही फर्जीवाड़े की पोल खुलेगी।

2018 में पहले चल रहा था घोटाला
एक पीड़ित व्यापारी ने बताया कि स्टांप घोटाला 2018 से भी पहले चल रहा था। आरोपी विशाल वर्मा 2018 में व्यापारी को कोषागार लेकर गया था। स्टांप को लेकर कुछ विवाद हुआ था। ये मामला जिला कोषागार के उच्च अधिकारी और रजिस्ट्री कार्यालय तक पहुंचा था। इससे पहले घोटाले की पोल खुलती कि आरोपी विशाल ने कोषागार और रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों को मैनेज कर दिया था।
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आरोपी विशाल वर्मा के खिलाफ पहले से मुकदमें दर्ज है। पीड़ित व्यापारियों ने एक लिस्ट दी है, जिसको मुकदमे में शामिल कराया जाएगा। आरोपी विशाल को पुलिस गिरफ्तार करेगी। पूछताछ के बाद आरोपी कई राज खोलेगा, जिसके बाद बड़ी कार्रवाई होगी।
दीपक मीणा, डीएम
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