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हस्तिनापुर वन्य क्षेत्र में नया साल मनाने पहुंचे पर्यटक

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हस्तिनापुर। मुल्कों के बीच इंसान की खींची सरहद की परवाह पंछी, नदियां और पवन के झोंके नहीं करते। यह पंक्ति हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में आने वाले प्रवासी पक्षियों पर सटीक बैठती है। सरहद और सियासी बंदिशों को लांघकर प्रवासी पक्षी सेंक्चुअरि पहुंच रहे हैं। सर्दी के चार माह यहां बिताने के बाद मार्च में ये पक्षी अपने वतन लौट जाएंगे। इन प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए नए वर्ष पर विभिन्न राज्यों से पर्यटक एवं पक्षी प्रेमी यहां पहुंच रहे हैं।
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यूरोपीय देशों से कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों में से कुछ प्रतिवर्ष यहां आने के लिए एक दिन में दस हजार किमी से अधिक की की दूरी तय करते हैं। आजकल इनके कलरव से झीलें और गंगा गुलजार हैं। भीकुंड की झीलों में सौ से अधिक साइबेरियाई हंसों ने डेरा जमा लिया है। इनकी अठखेलियां पक्षी प्रेमियों के मन को हर्षित कर रही हैं। साइबेरिया, मध्य एशिया, चीन, पूर्वी यूरोप के पक्षियों के लिए सेंक्चुअरि में मौजूद वेटलैंड निवास स्थल बन जाती है। प्रवासी पक्षी सेंक्चुअरि के गर्म मौसम में प्रजनन करने के लिए आते हैं।
शांत वातावरण में प्रकृति के खूबसूरत नजारे
शहर की भीड़ और शोर से दूर परिवार के साथ घूमने के लिए हस्तिनापुर सेंक्चुअरि बेहतर विकल्प है। इन दिनों यहां प्रकृति के अद्भुत नजारे, हरियाली एवं शांत वातावरण में वन्यजीवों की भरमार है। सेंक्चुअरि में हरियाली के बीच वन्यजीवों की वास स्थली वाले क्षेत्र में सैकड़ों प्रजाति के प्रवासी और अप्रवासी पक्षी मौजूद हैं।
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नाचते मोर और हिरणों के झुंड आकर्षण
सेंक्चुअरि में प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट, नाचते मोर एवं हिरणों का झुंड पर्यटकों के लिए कौतूहल से कम नहीं हैं। सेंक्चुअरि में इन पक्षियों के प्रवास और रहन-सहन के लिए वन विभाग ने वेटलैंड क्षेत्र बनाए हैं। जंगल के बीच कई सूखे नदी- नालों से जंगली पशुओं को गुजरते देखना पर्यटकों को रोमांचित करता है।
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