मेरठ में सरकारी जमीन पर बने शौचालय तोड़कर आवास बनाने के मामले में प्रशासन ने जहां रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। वहीं इस मामले में जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार ये शौचालय भारत पाकिस्तान बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आये विस्थापितों के लिए बनाये गये थे। जिन पर 80 के दशक में लोगों ने कब्जा करना शुरू कर दिया।
अमर उजाला माय सिटी में शुक्रवार को सार्वजनिक शौचालयों को तोड़कर आवास बनाने का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था। समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने इस जमीन और शौचालय निर्माण कब और किसने कराया इसका रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। तहसील सूत्रों का कहना है कि सजरे के आधार पर जमीन का खसरा नंबर निकाल कर इसका रिकार्ड देखा जायेगा। फिलहाल जो जानकारी प्रशासन ने जुटायी है, उसके अनुसार ये शौचालय पाकिस्तानी विस्थापितों के लिए बनाये गये थे। क्षेत्रीय लोगों से जुटायी गई जानकारी के आधार पर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि 1947 में भारत पाकिस्तान बंटवारे के बाद पंजाबी समाज के बहुत सारे लोग मेरठ विस्थापित होकर आये थे। इन लोगों को उस समय आज जहां पर भगत सिंह मार्केट है, वहां पर ठहराया गया था। इन परिवारों के लिए तब कालका प्रसाद की बगिया जो कि सरकारी जमीन है, उस पर शौचालय बनाये गये थे। जिसमें चालीस शौचालय पुरुषों के लिए और महिलाओं के लिए अलग से कांप्लैक्स बनाया गया था।
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