गांव मोरना में बने शौचालय को रसोईघर और गोदाम बना दिया गया
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स्वच्छत भारत अभियान के तहत ओडीएफ का दर्जा प्राप्त मोरना गांव में शौचालयों को गोदाम और रसोईघर बना दिया हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में 232 शौचालयों का निर्माण हुआ था, लेकिन अभी भी 109 शौचालय ऐसे हैं, जिनके टैंक नहीं बनाए गए हैं, ऐसे में शौचालय बनने के बाद भी इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति उस गांव की है जहां के ग्राम प्रधान को वर्ष 2016 में ओडीएफ के लिए जिला अधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया गया था। मामला यूपी के मेरठ शहर का है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2016 में गांव को शौच मुक्त घोषित कर दिया गया था। गांव में शौचालयों का निर्माण कराया गया, लेकिन उनके लिए टैंक नहीं बनाए गए। सिर्फ चारदीवारी का निर्माण कर सीट रख जिम्मेदारों ने वाहवाही लूट ली, ऐसे में शौचालय बनने के बाद भी कई लोग आज भी खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। आरोप है कि वे कई बार ग्राम प्रधान व संबंधित विभाग के अफसरों से इसकी शिकायत कर चुके हैं। शिकायत के बाद अफसर जांच के लिए भी आए, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
न सीट लगी, न टैंक बना
लाभार्थी ममता ससुर रामानंद ने बताया कि घर में शौचालय तो बना, लेकिन इसे टैंक से नहीं जोड़ा गया। सीमा ने बताया कि उसकी सास लाभार्थी जगवती के नाम पर घर में शौचालय का निर्माण हुआ, लेकिन न सीट लगी न टैंक बस चार दिवारी बनाकर चले गए। लाभार्थी शबनम पत्नी फुरकान के घर पर बने शौचालय को भी टैंक से नहीं जोड़ा गया। अब इस परिवार ने शौचालय रसोईघर बना लिया है। मुध और उनका पति रंजीत दोनों ही दिव्यांग है। वह शौचालय के लाभार्थी तो बन गए, लेकिन शौचालय टैंक से नहीं जोड़ा गया।