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आज जरूरत तय करती है लहजा कैसा रखना है...

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सरधना। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में मोहल्ला धर्मपुरा में मुशायरे का आयोजन किया गया। आयोजित इस अज़ीम-ओ-शान मुशायरे में देशभर के नामचीन शायरों ने शिरकत की और अपने कलाम से समां बांध दिया।
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कार्यक्रम के संयोजक व समाजसेवी हाजी आफताब अंसारी ने बच्चों के खानपान और उनकी परवरिश पर चिंता जताते हुए अभिभावकों से आह्वान किया कि मौजूदा दौर में बच्चों की सेहत और तालीम पर खास ध्यान देने की ज़रूरत है। मोहम्मद अली शाह ने भी शिक्षा को समाज की बुनियाद बताते हुए जागरूकता की अपील की। मुशायरे में मशहूर शायर अरशद ज़िया मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा कि मीठा मीठा रखना है या कड़वा कड़वा रखना है, आज ज़रूरत तय करती हैं लहजा कैसा रखना है। अब्दुल सलाम फरीदी ने देश के जज़्बातों को बयां करते हुए पढ़ा कि बर्फ की वादी में जा सोए सभी शोला-बयां, क़ौम के जज़्बात को लफ़्ज़ों से गरमाने के बाद।
शाहिद मिर्ज़ा ने कहा जब इसका इल्म था कि ये धोया न जाएगा, मैला किया था आपने किरदार किस लिए। डॉ. फुरक़ान सरधनवी ने शांति और एकता पर जोर देते हुए कहा कि बुग़्ज़-ओ-नफ़रत के चिराग़ों को बुझा दो यारो, मुत्तहिद रहने से ही अम्न-ओ-अमां रहता है। इस अदब की महफिल में हसरत खतौलवी, मुरसलीन माहिर मेरठी, कलीम चारथावली, निसार अहकर फलावदवी, अब्दुल सत्तार नवाबगढ़ी, गुलज़ार अहमद गुलज़ार और अब्दुल सलाम सरधनवी ने भी अपने शेरों से मुशायरे को यादगार बना दिया। इस दौरान पूर्व चेयरमैन असद ग़ालिब, मोहम्मद अली शाह, अशरफ राणा, हनीफ राणा, अफज़ाल मलिक, तराबुद्दीन अंसारी, डॉ. शाकिर हसन उपस्थित रहे।
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