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जनता और बैंकों का इम्तिहान आज   

Thu, 10 Nov 2016 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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1000 और 500 रुपये के नोट नहीं देने की गुुहार लगाकर सब्जी बेचता दुकानदार। - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार के 500 और एक हजार के नोट बंद करने के फैसले के बाद बैंकों और आम जनता का असल इम्तिहान आज होगा। माना जा रहा है कि आज बैंकों और डाकघरों में भारी भीड़ उमड़ेगी। जबकि सच्चाई यह है कि बैंकों के पास पूरे इंतजाम नहीं हैं। बैंक अधिकारी देर रात तक तैयारियों में जुटे रहे और पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर बैंक शाखाओं पर पुलिस बल मांगा गया है। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने भी विशेष योजना बनाई है। बैंकों में पुलिस बल एवं पीएसी तैनात की जाएगी। बैंकों के साथ-साथ डाकघरों में धन जमा और बदला जाएगा। 
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केंद्र सरकार के आदेश के बाद बुधवार को बैंक आम जन के लिए बंद रहे। शहर और देहात की कई शाखाओं पर लोग पूछताछ करने पहुंचे। लेकिन अधिकारियों ने सरकार के निर्णय से उन्हें अवगत करा दिया। दरअसल बैंक अधिकारियों की पूरी टीम बृहस्पतिवार की तैयारियों में जुटी रही।
बृहस्पतिवार से बैंकों में पुराने नोटों के जमा करने और उन्हें बदलने की प्रक्रिया आरंभ होगी। दिन भर यह व्यवस्था की जाती रही कि लोगों को पुराने 500 और एक हजार के नोट के बदले कैसे 100 और दूसरे छोटे नोट दिए जाएंगे। अधिकारियों ने साफ कहा कि अभी नए नोट नहीं आए हैं, इसलिए नई करेंसी अभी जनता को उपलब्ध नहीं होगी। वहीं हालात यह हैं कि शहर के घंटाघर स्थित प्रधान डाकघर में रात तक कैश नहीं था। ना ही यहां नोट चेंज कराने वाले व्यक्ति से भरवाए जाने वाला संलग्नक फार्म पहुंचा था। देहात के डाकघरों में भी यही व्यवस्था थी। ऐसे में डाकघर अफसर रात तक परेशान थे। उच्चाधिकारियों को फोन मिलाकर इनकी डिमांड की जा रही थी। 
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बैंकों में सबसे बड़ी समस्या छोटे नोटों की थी। बागपत रोड स्थित एसबीआई की शाखा, केनरा बैंक की बागपत शाखा और शारदा रोड पीएनबी में अधिकारी और उनका स्टाफ इसी गुणा-भाग में लगा रहा। प्रबंधक इसे लेकर परेशान थे कि बडे़ नोटों के बदले में देने के लिए 100 और 50 के नोट कम ना पड़ जाएं। बैंक में इनका स्टॉक कम हो सकता है। 
हो सकता है हंगामा 
500 और एक हजार के नोट बदलने के लिए आम जन भी बृहस्पतिवार के इंतजार में हैं। बृहस्पतिवार को बैंक खुलने पर आपाधापी मचने की पूरी संभावना है। ज्यादा संख्या में लोगों के आने के कारण कैश खत्म होने पर बैंकों और डाकघर में हंगामे की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बैंकों में मंथन होता रहा। देर शाम तक स्टाफ रात तक बैठक कर व्यवस्था बनाने में लगा था। ब्रांच मैनेजर अपने रीजन और जोनल ऑफिस के अधिकारियों से संपर्क करके व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी देते रहे। 
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