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Meerut News: सर्वपितृ अमावस्या आज, तर्पण और दान के साथ करेंगे पितरों को विदा

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- ज्ञात अज्ञात पितरों के श्राद्ध और तर्पण का विशेष दिन
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- जरूरतमंदों को भोजन कराने और दान करने का विशेष महत्व
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पितृ पक्ष का समापन शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि याद नहीं है या जो किसी कारणवश पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए हैं। वे भी इस दिन अपने पितरों के निमित्त धार्मिक कार्य कर सकते हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर अपने वंशजों के यहां आते हैं। अमावस्या के दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के माध्यम से उन्हें विदाई दी जाती है। इस दिन पितरों की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए तिल और जौ मिले जल से तर्पण करने का विशेष महत्व बताया गया है। पितरों का स्मरण करते हुए परिवार की सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है। सर्वपितृ अमावस्या पर पिता और माता के कुल की पूर्व पीढ़ियों के पितरों का स्मरण कर तर्पण करने की परंपरा है।
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दान पुण्य के साथ करें दीपदान
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराने तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने का विशेष महत्व है। गाय को हरा चारा या पालक खिलाना भी शुभ माना जाता है। शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घर के बाहर या छत पर दीपक जलाकर पितरों का स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि दीपदान के साथ पितरों से परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है। पीपल के पेड़ की पूजा कर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की भी परंपरा है। सर्वपितृ अमावस्या का संदेश अपने पूर्वजों का स्मरण करने, उनके प्रति कृतज्ञता जताने और जरूरतमंदों की सहायता करने से जुड़ा है।
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