आज रंगों के त्योहार पर एक ही दिन में महानगर में करीब 134 करोड़ लीटर पानी बर्बाद हो जाएगा। अगर सभी लोग पानी में घुले रंग की बजाय गुलाल और फूलों से होली खेलें, तो पानी की इतनी बड़ी बर्बादी होने से बच जाए। मगर पानी बचाने के लिए दी जाने वाली दलीलें मानने को कोई तैयार नहीं है।
महानगर में प्रतिदिन एक से डेढ़ अरब लीटर पानी की खपत है, जो ट्यूबवेल, सबमर्सिबल, हैंडपंपों के माध्यम से भूगर्भ और भोला झाल गंगनहर से लिया जा रहा है। गंगाजल और भूगर्भ जल से ही शहर की जनता प्रतिदिन प्यास बुझाती है और अपने दैनिक कार्यों को पूरा करती है। होली के त्योहार पर पानी की खूब बर्बादी होती है। महानगर में ही लाखों रुपये रंग और गुलाल पर खर्च किए जाते हैं। इस रंग को पानी में मिलाकर एक-दूसरे पर डाला जाता है। बाल्टियों, गुब्बारों और पिचकारियों में भरकर फेंका जाता है। इसके बाद जब होली का खुमार उतर जाता है, तो उस रंग को शरीर से छुटाने के लिए फिर से होकर पानी बहाया जाता है। कुल मिलाकर प्रतिदिन महानगर में होने वाली पानी की खपत सीधे दोगुनी से अधिक हो जाएगी।
नगर निगम ने कर रखा पानी का स्टॉक
नगर निगम ने भी दो दिन पहले से अपने जलाशयों में स्टॉक करना शुरू कर दिया था, जिससे कि पानी की निर्बाध आपूर्ति दी जा सके। इसके लिए सभी संसाधनों और टीमों को लगाया गया। सभी भूमिगत जलाशयों के साथ ही ओवर हैड टैंक भी पानी से भर लिए गए हैं।
प्रतिदिन जल दोहन का आंकड़ा
संसाधन पानी का दोहन
पाइपलाइन/नलकूप एक लाख किलो लीटर प्रति घंटा पानी निकलता है। आठ घंटे लगातार मोटर चलती है। यानी 80 करोड़ लीटर पानी का दोहन
10 एचपी सबमर्सिबल 570 50 हजार ली. प्रति घंटा पानी निकलता है। आठ घंटा मोटर चलती है। यानी 40 करोड़ लीटर पानी का दोहन
वन एचपी सबमर्सिबल 3000 5000 किलो लीटर प्रति घंटा। औसत आठ घंटा जल दोहन यानी कुल चार करोड़ लीटर जल दोहन
हैंडपंप व निजी सबमर्सिबल करीब 10 करोड़ लीटर जल का दोहन
कुल जल दोहन - 134 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन
होली पर लगेगा दोगुना यानी - 268 करोड़ लीटर पानी
रंग में भंग न डाल दें सिल्ट से भरे नाले
मेरठ। आज पानी की खपत जहां दोगुनी होगी, वहीं नाले सिल्ट से भरे होने के कारण पानी ओवरफ्लो होने का भी डर है। महानगर में ओडियन, आबूलेन समेत कुल सात नाले बड़े हैं। इनके अलावा 200 से अधिक छोटे नाले हैं। अधिकांश नाले गंदगी से भरे पड़े हैं। इनसे जल की निकासी भी नहीं हो पाती। कोटला, थापरनगर, मोहनपुरी, ब्रह्मपुरी में चोक नालों को देखा जा सकता है।
वर्जन
- त्यौहार पर पानी की खपत दोगुनी हो जाती है। हमारा काम शहर की जनता को सुविधा देना है। हमने अपनी तैयारी कर ली हैं।
- सुनील सिंहल, अधिशासी अभियंता जलकल
- नालों की सफाई चल रही है। पानी की खपत बढ़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं है कि नाले ओवरफ्लो हो जाएंगे।
- डा. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी