सहारनपुर। टीबी से पीड़ित मरीज के परिजनों को बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए दवा लेनी होगी। जिससे परिवार में किसी और सदस्य में यह बीमारी न फैले। बच्चों को छह महीने और बड़ों को दवा तीन महीने लेनी होगी। क्योंकि टीबी बीमारी हवा के जरिए संक्रमित कर सकती है।
केंद्र सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त करना चाहती है। इसको देखते हुए टीबी मरीजों को तमाम योजनाएं चलाकर लाभांवित किया जा रहा है। मरीजों को हर महीने 500 रुपये मिलते हैं। इसके बाद भी टीबी बीमारी कम नहीं हो पा रही है। मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को सुरक्षा के दायरे में लाया जा रहा है। जिले में करीब 6500 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। 270 मरीज मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) के है। टीबी मरीजों की देखरेख और दवा आदि देने के लिए परिवार का व्यक्ति ही उसकी तिमारदारी में रहता है। जिससे यह खतरा परिवार के सदस्यों को भी बन जाता है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने मरीज के साथ परिवार को सुरिक्षत करने का फैसला लिया है। टीबी मरीज के साथ परिवार के लोगों को भी दवा दी जाएगी। शून्य से 14 साल के बच्चों को छह महीने तक रोजाना एक गोली खानी होगी, जबकि उससे बड़ों को तीन महीने दवा खाएंगे। उन्हें एक सप्ताह में तीन गोली मिलेगी। उन गोलियों को एक ही दिन में लेना होगा।
टीबी मरीजों के परिजनों को भी बचाव के लिए दवा खिलाई जाती है। बच्चों और बड़ों का कोर्स अलग-अलग है। जिले में 6500 मरीज है, जिनका इलाज चल रहा है।
-डॉ. सर्वेश कुमार सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी