मेरठ। कोतवाली के तीरगिरान में हुई हिंसा में सराफा व्यापारी सुशील रस्तोगी के इकलौते बेटे शुभम रस्तोगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा था। इसी मामले में पुलिस नामजद आरोपी मतलूब उर्फ भूरा के खिलाफ सुबूत नहीं जुटा सकी। पुलिस की कमजोर विवेचना के चलते नौ साल बाद आरोपी मतलूब को कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। आरोपी काे घटनास्थल पर ही मौजूद न होना बताया गया।
न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट संख्या-1 मेरठ सुरेश चंद द्वितीय ने हत्या के इस मामले में आरोपी मतलूब उर्फ भूरा निवासी कोतवाली को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया। आरोपी के अधिवक्ता नितिन कौशिक ने बताया कि कोतवाली में वादी सुशील रस्तोगी ने 10 मई 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसका पुत्र शुभम रस्तोगी अपने ममेरे भाई सचिन व नितिन के साथ मंदिर गया था। जब वह दर्शन करके लौट रहे थे तो राम सहाय रेवड़ी वालों की दुकान के सामने लगभग 200 लोग उनकी ओर आते हुए दिखाई दिए। उनके हाथ में धारदार हथियार और तमंचे थे। आरोप था कि सांप्रदायिक दंगा करते हुए उसके पुत्र शुभम की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
मामले की जांच में आरोपी मतलूब का नाम प्रकाश में आया था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया। इसी मामले में अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी ने शुभम की हत्या नहीं की है। घटना वाले दिन वह मौके पर मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोपी के पक्ष में कुछ और तथ्य पेश किए। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त करार दिया।
एसआईटी गठित की, फिर सुबूत नहीं जुटाए
तीरगिरान हिंसा में एसआईटी गठित की गई थी। इसमें 21 नामजद आरोपी बने थे। एसआईटी नामजद आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत नहीं जुटा सकी।