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गड़बड़झाला: कागजों में ही बना डाले थ्रेसिंग फ्लोर, राजमिस्त्री को हवा में दिए रुपये, लाखों हड़पे

Sat, 22 Jul 2023 05:53 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत

सार

बागपत जनपद में थ्रैसिंग फ्लोर के निर्माण में लाखों की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। यहां कर्मचारी ने कागजों में राजमिस्त्री से थ्रैसिंक फ्लोर का निर्माण कराकर लाखों का घपला कर लिया।
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document - फोटो : pixabay
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विस्तार
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बड़ौत में थ्रैसिंग फ्लोर के निर्माण में लाखों की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। एक कर्मचारी ने कागजों में ही राजमिस्त्री के द्वारा थ्रेसिंग फ्लोर का निर्माण कराकर लाखों रुपयों का गोलमाल कर लिया। यह सारा गड़बड़झाला एक शपथ पत्र से उजागर हुआ। जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जांच बैठा दी है। डीडी कृषि को जांच अधिकारी बनाया गया है। डीएम ने कार्रवाई के लिए जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है।

कृषि योजना के तहत वर्ष 2020 में जनपद में छह किसानों के यहां फसल झाड़ने और सुखाने के लिए पक्का चबूतरा यानी थ्रेसिंग फ्लोर निर्माण के लिए शासन ने करीब 10 लाख 20 हजार की धनराशि आवंटित की थी। प्रत्येक थ्रेसिंग फ्लोर के लिए 1.70 लाख की धनराशि तय की गई। जिसके बाद सूप, मुकंदपुर, रठौडा, सिलाना में एक-एक और बासौली में दो थ्रेसिंग फ्लोर का निर्माण होना दर्शाया गया। संवाद

खुद ही कर दिया सत्यापन

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आरोपी कर्मचारी ने कागजों में ही थ्रेसिंग फ्लोर का निर्माण करा दिया और सत्यापन भी श्रेणी-2 के अधिकारी से न कराकर खुद वर्ग-2 का कर्मचारी होते हुए कर दिया। बाद में भुगतान कराने के लिए बिना जीएसटी नंबर और बिना फर्म पैड की मोहर बिना फर्जी बिल और अन्य कई फर्जी राजमिस्त्री के नाम बिल पास करा दिए गए।
 

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इस तरह हुआ मामला उजागर
आरोपी कर्मचारी ने थ्रेसिंग फ्लोर के निर्माण के लिए सिलाना गांव के राजमिस्त्री प्रदीप कुमार का नाम लिखा और बिल भुगतान में प्रदीप को निर्माण की एवज में 25,650 रुपये देना बताया, लेकिन जब इसकी जानकारी राजमिस्त्री प्रदीप को हुई तो उसने डीएम और जिला कृषि अधिकारी को अपना फोटो चस्पा सहित शपथ पत्र दिया और बताया कि मेरे द्वारा मुकंदपुर गांव में कोई थ्रेसिंग फ्लोर का निर्माण नहीं किया और न ही किसी ने उसे कोई भुगतान दिया है। जिसके बाद डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच डीडी एग्रीकल्चर दुर्विजय को सौंपी है।

ग्रामीणों ने भी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की
इस प्रकरण में मुकंदपुर गांव के किसान लोकेश कुमार ने भी डीएम को शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। लोकेश ने आरोप लगाया कि थ्रेसिंग फ्लोर के निर्माण का भुगतान पाने के लिए फर्जी बिल लगाएं गए है, न तो बिलों पर जीएसटी नंबर है और न ही फर्म पैड पर बिल और न ही फर्म पैड की मोहर है। बताया कि अलग-अलग गांवों में थ्रेसिंग फ्लोर निर्माण के लिए ट्रैक्टर-ट्राली से 80 क्विंटल बालू मौरंग अलग-अलग दूरी के गांवों में पहुंचाना दर्शाया गया, लेकिन हैरानी की बात है कि सभी गांवों का किराया एक जैसा यानी 12,500 रुपये दर्शाया गया है।

कर्मचारी ने ट्रैक्टर मालिक के नंबर की जगह बिल पर खुद का ही मोबाइल नंबर लिखा
शिकायतकर्ता लोकेश ने बताया कि थ्रेसिंग फ्लोर के निर्माण के लिए जिस ट्रैक्टर मालिक अनीस कुमार रठौड़ा का नाम लिखा गया है, बिलों पर अनीस का नंबर न डालकर उक्त कर्मचारी ने अपना ही मोबाइल नंबर लिखा हुआ है। डीएम और मुझे शिकायत प्राप्त हुई है, जो काफी गंभीर है। पूरे प्रकरण की जांच करने के लिए डीडी एग्रीकल्चर दुर्विजय को जांच अधिकारी बनाया गया है। - बाल गोविंद जिला कृषि अधिकारी बागपत

 

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