इस तरह हुआ मामला उजागर
आरोपी कर्मचारी ने थ्रेसिंग फ्लोर के निर्माण के लिए सिलाना गांव के राजमिस्त्री प्रदीप कुमार का नाम लिखा और बिल भुगतान में प्रदीप को निर्माण की एवज में 25,650 रुपये देना बताया, लेकिन जब इसकी जानकारी राजमिस्त्री प्रदीप को हुई तो उसने डीएम और जिला कृषि अधिकारी को अपना फोटो चस्पा सहित शपथ पत्र दिया और बताया कि मेरे द्वारा मुकंदपुर गांव में कोई थ्रेसिंग फ्लोर का निर्माण नहीं किया और न ही किसी ने उसे कोई भुगतान दिया है। जिसके बाद डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच डीडी एग्रीकल्चर दुर्विजय को सौंपी है।
ग्रामीणों ने भी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की
इस प्रकरण में मुकंदपुर गांव के किसान लोकेश कुमार ने भी डीएम को शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। लोकेश ने आरोप लगाया कि थ्रेसिंग फ्लोर के निर्माण का भुगतान पाने के लिए फर्जी बिल लगाएं गए है, न तो बिलों पर जीएसटी नंबर है और न ही फर्म पैड पर बिल और न ही फर्म पैड की मोहर है। बताया कि अलग-अलग गांवों में थ्रेसिंग फ्लोर निर्माण के लिए ट्रैक्टर-ट्राली से 80 क्विंटल बालू मौरंग अलग-अलग दूरी के गांवों में पहुंचाना दर्शाया गया, लेकिन हैरानी की बात है कि सभी गांवों का किराया एक जैसा यानी 12,500 रुपये दर्शाया गया है।
कर्मचारी ने ट्रैक्टर मालिक के नंबर की जगह बिल पर खुद का ही मोबाइल नंबर लिखा
शिकायतकर्ता लोकेश ने बताया कि थ्रेसिंग फ्लोर के निर्माण के लिए जिस ट्रैक्टर मालिक अनीस कुमार रठौड़ा का नाम लिखा गया है, बिलों पर अनीस का नंबर न डालकर उक्त कर्मचारी ने अपना ही मोबाइल नंबर लिखा हुआ है। डीएम और मुझे शिकायत प्राप्त हुई है, जो काफी गंभीर है। पूरे प्रकरण की जांच करने के लिए डीडी एग्रीकल्चर दुर्विजय को जांच अधिकारी बनाया गया है। - बाल गोविंद जिला कृषि अधिकारी बागपत