समाज कल्याण विभाग में नौकरी दिलाने का दिया झांसा, शताब्दीनगर के रहने वाले हैं तीनों पीड़ित युवक
- एक महीना 10 दिन तक लखनऊ में रखा
-आरोपियों के खिलाफ परतापुर थाने पर दी तहरीर
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। समाज कल्याण विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर कुछ लोगों द्वारा परतापुर थाना क्षेत्र के शताब्दीनगर निवासी तीन युवकों से पांच लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि आठ माह पूर्व शास्त्रीनगर निवासी भारत भूषण नामक व्यक्ति ने शताब्दीनगर निवासी शांतनु मिश्रा, ललित चौहान और सचिन कुमार से समाज कल्याण विभाग में नौकरी के नाम पर फार्म भरवाए और ट्रैनिंग के नाम पर लखनऊ स्थित समाज कल्याण निदेशालय में बुलाया गया। इसकी एवज में आरोपियों ने तीनों युवकों ने पांच लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित युवकों ने बुधवार को परतापुर थाने में तहरीर देते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परतापुर थाने में दी गई तहरीर के अनुसार, शास्त्रीनगर निवासी भारत भूषण ने समाज कल्याण विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर इसी साल फरवरी में शांतनु, ललित और सचिन की आरके सिंह नाम के व्यक्ति से फोन पर बात कराई थी। इसके बाद तीनों को कुछ फार्म करने के लिए दिए गए। तय हुआ कि तीनों को नौकरी के लिए पांच लाख रुपये देने होंगे। जिसके बाद तीनों ने तीन लाख रुपये नगद और कुछ रुपये ऑनलाइन आरके सिंह के खाते में ट्रांसफर कर दिए। कुछ दिनों बाद तीनों को ट्रेनिंग के नाम पर लखनऊ स्थित समाज कल्याण विभाग के निदेशालय में बुलाया गया। तीनों को लखनऊ में एक महीना दस दिनों तक रखा गया। इसके बाद कहा कि गया कि तीनों का पुलिस सत्यापन हो रहा है। इसके लिए तीनों युवकों के बारे में पतरापुर पुलिस से सत्यापन कराया गया। इसके बाद आरोपियों ने तीनों युवकों से डेढ़ लाख रुपये लिए गए। इसके बाद तीनों को आफर लेटर जारी किया और बाकी रुपयों की मांग की गई। युवकों ने ज्वाइनिंग लेटर मांग तो भारत भूषण ने कहा कि उसका बेटा निखिल शर्मा भी समाज कल्याण विभाग में तैनात है, बाकी रुपयों का इंतजाम करो। तीनों की ज्वाइनिंग हो जाएगी। बुधवार को परतापुर थाने पहुंचे तीनों युवकों ने पुलिस को बताया कि अब आरोपियों का फोन बंद आ रहा है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि युवकों की ओर से परतापुर थाने में तहरीर दी गई है, मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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समाज कल्याण विभाग ने भी ट्रेनिंग लेटर को सही बताया था
पीड़ित शांतनु ने बताया कि ट्रेनिंग लेटर लेकर वह तीनों स्थानीय विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग कार्यालय में गए थे। जहां कर्मचारियों ने निदेशालय की ओर से जारी लेटर को विभाग का ही बताया था। जब वह ट्रेनिंग के लिए लखनऊ निदेशालय पहुंचे तो वहां नई नियुक्ति पाए लोग ट्रेनिंग करते मिले थे। आरोपियों ने उन्हें वहां एक महीना दस दिन रखा लेकिन ट्रेनिंग नहीं कराने दी, कहा कि बिना ट्रेनिंग के ही नौकरी लगवाएंगे। इसके बाद पुलिस का भी सत्यापन कराया। इस कारण आरोपियों पर शक नहीं हुआ कि वो ठगी कर रहे है। जब ज्वाइनिंग नहीं कराई और फोन बंद मिले तब अहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है।