दौराला (मेरठ)। पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते दहेज उत्पीड़न के एक पुराने मामले में कोर्ट ने तीन आरोपियों को सजा सुनाई है। कोर्ट ने महिला के पति इकरार उर्फ सोनू व जेठ इरशाद को 10-10 वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार जुर्माना लगाया। वहीं, महिला की सास शकीला को तीन साल का कारावास और दो हजार का अर्थदंड लगाया गया।
सीओ दौराला प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि साल 2015 में दौराला थाने में जम्मू की जानीपुर निवासी प्रीति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि गांव समौली निवासी इकरार उर्फ सोनू ने पहली पत्नी होते हुए दूसरी शादी की। ससुराल पक्ष के अन्य लोगों ने दहेज की मांग को लेकर उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया। आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की। उसे बंधक बनाकर रखा और दहेज की मांग पूरी न होने पर जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की गई।
विवेचना के बाद पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय एडीजे/एफटीसी प्रथम मेरठ ने सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषी इकरार उर्फ सोनू व इरशाद को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास व पांच-पांच हजार की सजा सुनाई। वहीं, शकीला को तीन वर्ष की सजा सुनाई और दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी लगातार जारी रहेगी।