फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी मार्कशीट बनाकर उच्च शिक्षण संस्थान में दाखिला दिलाने वाले तीन गिरफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। एसटीएफ ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की अंक बढ़ाकर फर्जी मार्कशीट बनाकर उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश दिलाने वाले गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह के तीन सदस्यों जितेंद्र सिंह निवासी पांडवनगर, शिवकुमार निवासी जागृति विहार व निखिल तोमर निवासी आशानगर जेल चुंगी को सोमवार को गंगानगर से गिरफ्तार किया।
विज्ञापन

आरोपी 10-15 हजार रुपये लेकर बिना परीक्षा दिए उत्तर प्रदेश ओपन स्कूल बोर्ड से बैक डेट की फर्जी मार्कशीट भी बनवाते थे। दस साल से गिरोह लखनऊ निवासी आरोपी की मदद से फर्जीवाड़ा कर रहा था। लखनऊ निवासी आरोपी की तलाश जारी है।
एएसपी ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि एसटीएफ को सूचना मिली थी कि गंगानगर में मकान नंबर एफ-230 में कुछ लोग छात्रों की मार्कशीट में हेराफेरी कर उनके अंक बढ़ाकर उन्हें उच्च संस्थानों में एडमिशन दिलाते हैं। सूचना पर एसटीएफ ने सोमवार रात छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास बड़ी संख्या में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की मार्कशीट तथा विभिन्न स्कूलों की मुहरें बरामद की गईं। आरोपी इनका प्रयोग फर्जी मार्कशीट व टीसी आदि के बनाने में करते थे।
विज्ञापन

कूरियर से मार्कशीट भेजता था लखनऊ का आरोपी
फर्जी टीसी बनाने के लिए आरोपी तीन हजार रुपये लेते थे। गिरफ्तार आरोपी लखनऊ में रहने वाले साथी के माध्यम से मार्कशीट बनवाते थे। आरोपी छात्र का आधार कार्ड व फोटो लखनऊ में अपने साथी को उपलब्ध कराते थे और वह 10-15 दिन में मार्कशीट बनाकर, पोर्टल पर चढ़ाकर इनको कूरियर के माध्यम से भेज देता था। अपने साथी को ये 5 हजार रुपये प्रति मार्कशीट भेज देते थे। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर गंगानगर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। आगे की विवेचना अब गंगानगर पुलिस करेगी। आरोपियों के लखनऊ निवासी साथी को भी तलाश किया जा रहा है।
-

ये सामान हुआ बरामद
आरोपियों के पास से एक कंप्यूटर, एक प्रिंटर, एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, 10 विभिन्न स्कूलों की मुहरें, हाईस्कूल इंटरमीडिएट की करीब 75 मार्कशीट, टीसी, सनद और एक कार बरामद की गई है।
-
12वीं पास जितेंद्र है सरगना, 10 साल में बनाई हजारों मार्कशीट
एएसपी के मुताबिक गिरोह का सरगना जितेंद्र सिंह है। वह 12वीं पास है। शिक्षण संस्थाओं में सेटिंग कर वह एडमिशन कराता है। शिवकुमार एमए पास है और गढ़ रोड पर किराए पर भवन लेकर एक स्कूल चलाता है। निखिल तोमर हापुड़ रोड स्थित जाहिदपुर में अपने पिता के स्कूल में मैनेजर है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 10 साल में हजारों लोगों की फर्जी मार्कशीट बनवा चुका है। फर्जी मार्कशीट बनवाकर लोगों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लिया और फिर निजी संस्थानों में नौकरी भी हासिल कर ली। आरोपियों ने किन-किन लोगों को मार्कशीट उपलब्ध कराई है, इसकी जांच की जा रही है।
-
फेल और कम नंबर वाले विद्यार्थियों की तलाश में रहते थे
आरोपियों ने कई जिलों में अपने गुर्गे छोड़े हुए हैं। ये लोग ऐसे छात्र-छात्राओं की तलाश में रहते थे, जिन्हें उच्च संस्थान में प्रवेश लेना होता था लेकिन उनके अंक प्रवेश के लिए पर्याप्त नहीं होते थे। उनकी मार्कशीट में प्रदर्शित प्राप्तांक में कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से हेराफेरी कर उनके स्थान पर फर्जी तरीके से प्राप्तांक बढ़ाकर नई मार्कशीट तैयार कर छात्रों को उपलब्ध करा देते थे। इससे उन्हें आसानी से उनके मनचाहे संस्थान में प्रवेश मिल जाता था। फेल विद्यार्थियों को 10-15 हजार रुपये में बिना परीक्षा दिए उत्तर प्रदेश ओपन स्कूल बोर्ड की बैक डेट की हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट उपलब्ध कराते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें