मेरठ। भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित की गई सरकारी सस्ते गल्ले की 184 दुकानों की नियुक्ति नए साल में आपूर्ति विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। निलंबित कोटेदार न केवल शेष दुकानों पर स्टे लेने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि उनका प्रयास अभी तक नियुक्त दुकानों को भी वापस लेना है।
वर्ष 2018 में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन की कालाबाजारी उजागर होने के बाद 184 दुकानें निलंबित कर उनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। कुछ समय बाद करीब 34 दुकानों पर स्टे मिल गया। फरवरी 2019 में विभाग ने 150 दुकानों को नए सिरे से नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते प्रक्रिया रुक गई। इसके बाद जनवरी 2020 में 65 दुकानों के लिए विज्ञप्ति जारी हुई, लेकिन 55 दुकान ही नियुक्त हो सकीं। काफी समय से विभाग 95 दुकानों की नियुक्ति की तैयारी कर रहा था कि तभी निलंबित कोटेदार फिर एक बार प्रक्रिया में बाधा बन गए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में करीब 300 से ज्यादा रिट निलंबित कोटेदारों की न्यायालय में लंबित है, जिनके जवाब विभाग दाखिल करने में हांफ रहा है। जिला आपूर्ति अधिकारी नीरज सिंह के अनुसार सभी प्रयास जारी हैं। जल्द लॉटरी की प्रक्रिया संपन्न होगी।