तीन मार्च को चंद्र ग्रहण का सूतक लगने से दिन में ही बंद हो जाएंगे मंदिर के कपाट
मेरठ। इस बार होलाष्टक के बाद चंद्र ग्रहण लग रहा है। सूतक काल ग्रहण से नौ घंटे पहले लग जाएगा। ऐसे में होलिका दहन के दूसरे दिन तीन मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। होली चार मार्च को खेली जाएगी।
ज्योतिषाचार्य आशा त्यागी और आचार्य अंकित चौधरी के अनुसार तीन मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक असर पूरे देश पर पड़ेगा।
पंचांग के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले लग जाएगा। ऐसे में तीन मार्च की सुबह से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा और शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद ही पूजा-पाठ और मांगलिक काम किए जा सकेंगे। इस बार दो मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा और 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी।
चंद्र ग्रहण प्रारंभ (चंद्रोदय के साथ) - 18:16
ग्रहण समाप्त - 18:46 चन्द्रोदय - 18:16
स्थानीय ग्रहण की अवधि - 30 मिनट 09 सेकेंड
सूतक प्रारंभ 3 मार्च - 09:30 बजे
सूतक समाप्त - 18:46 बजे
सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन पकाना व खाना वर्जित माना जाता है। हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को छूट रहेगी। इनके लिए सूतक दोपहर 03:35 बजे से प्रभावी माना जाएगा।
होलाष्टक और होलिका दहन :
24 फरवरी से शुरू हुआ होलाष्टक 3 मार्च को खत्म हो रहा है। इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। ऐसे में होलिका दहन दो मार्च को ही किया जाएगा।
ग्रहण के दौरान करें जप
ज्योतिष आचार्य पंडित विनोद त्रिपाठी के अनुसार ग्रहण के समय ऊं नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करें और सफेद वस्तुओं का दान करें और घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें।