हापुड़ अड्डा चौराहे के पास सरकारी जमीन पर बने अवैध कांप्लैक्स को एमडीए टीम ने मंगलवार सुबह सील कर दिया। कांप्लैक्स के भीतर बनी सभी 72 दुकानों को सील करने के साथ भीतर रखे सामान को पुलिस बल ने बाहर निकलवा दिया। इस कार्रवाई के बाद जहां कब्जेदारों में हड़कंप मचा है, वहीं प्रशासन इस अवैध कांप्लैक्स को कैंट के बंगला नंबर 210 बी की तर्ज पर जमींदोज करने की रणनीति में जुट गया है।
‘अमर उजाला’ ने 21 जून को हापुड़ अड्डा चौराहा के पास स्थित नजूल की खसरा नंबर 4632 पर 1675 वर्ग मीटर में अवैध रूप से कांप्लैक्स निर्माण का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले का मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने संज्ञान लेते हुए एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश पटेल को जांच कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जांच में जमीन न केवल नजूल (सरकारी) पायी गयी थी, बल्कि कब्जा भी 1675 वर्ग मीटर के बजाय करीब चार हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर पाया गया। जिसकी रिपोर्ट तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों को सौंप दी। बताया गया कि वर्तमान में इस सरकारी जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश पटेल ने कहा कि तहसील की रिपोर्ट में स्पष्ट हो चुका है कि जिस जमीन पर कांप्लैक्स बना है, वह सरकारी है। कब्जेदारों से उनके मालिकाना हक के साक्ष्य मांगे हैं। एमडीए ने अपनी कार्रवाई मंगलवार को की है। अभी कब्जेदारों का पक्ष सामने आ जाए, उसके बाद अगली कार्रवाई होगी। जिला प्रशासन इस मामले में कोई ढील नहीं बरतेगा।
‘यह जमीन जिला प्रशासन की है’
इस रिपोर्ट के आने पर एडीएम (वित्त एवं राजस्व) गौरव वर्मा ने जहां सभी कब्जेदारों को नोटिस जारी करते हुए अपने मालिकाना हक के साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 10 जुलाई तक का समय दिया। वहीं, एमडीए टीम ने मंगलवार सुबह सात बजे ही भारी पुलिस फोर्स के साथ कांप्लैक्स के भीतर सभी दुकानों पर सील लगा दी। इसके साथ ही कांप्लैक्स के बाहर बोर्ड भी लगा दिया, जिस पर लिखा है कि ‘यह जमीन जिला प्रशासन की है’।
सील के लिए बनी रणनीति
जहां कांप्लैक्स निर्माण हुआ है वह शहर का संवेदनशील स्थान है। कांप्लैक्स में कब्जेदारों की संख्या भी ज्यादा है। ऐसे में एमडीए और प्रशासन ने रणनीति तैयार कर सुबह ही इस कांप्लैक्स पर सील लगा दी। इसके लिए सीओ सिविल लाइन गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस सहित भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस फोर्स भी तैनात किया गया। जबकि टीम का नेतृत्व एमडीए के अधिशासी अभियंता एपी सिंह और सहायक अभियंता विवेक शर्मा ने किया। प्रशासन की तरफ से सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह और एसीएम गुलशन कुमार मौजूद रहे।
साठगांठ में पूरा हुआ था निर्माण
ऐसा नहीं कि इस कांप्लैक्स पर पहली बार सील लगी है। जब इस कांप्लैक्स का निर्माण हो रहा था, उस समय भी तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज यादव ने शिकायत मिलने पर एमडीए को कार्रवाई के आदेश दिए थे। जिस पर एमडीए टीम ने निर्माण पर सील लगा दी थी। लेकिन निर्माणकर्ताओं ने एमडीए अधिकारियों से साठगांठ करके सील तोड़कर निर्माण पूरा कर लिया। निर्माण पूरा होते ही बिल्डर ने तमाम दुकानें 10 लाख रुपये से 80 लाख रुपये के बीच बेच डालीं।
अब निर्माण गिराने की तैयारी
सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कांप्लैक्स निर्माण पर प्रशासन पूरी तरह सख्त है। जिस तरह कैंट क्षेत्र में बंगला नंबर 210 बी के व्यावसायिक निर्माण को गिराया गया था। उसी तर्ज पर प्रशासन भी अपनी जमीन पर हुए इस निर्माण को गिराने की रणनीति तैयार कर रहा है। लेकिन इससे पहले कब्जेदारों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दे रहा है।