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ये डाक्टर हैं पीएचडी वाले, मरीज बुलाते कैंसर वाले

Wed, 06 Sep 2017 06:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ वाहिद अली, मेरठ
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पीएचडी वाले डॉक्टर
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कैंसर! दहशत के लिए बस नाम ही काफी है। इसी दहशत का फायदा उठाने के लिए शहर और देहात में कई जगहों पर अनाधिकृत रूप से कैंसर मुक्ति के नाम पर केंद्र खोल दिये गये हैं। शहर के बीचों बीच फैज-ए-आम डिग्री कालेज में एक ऐसा ही केंद्र खोला गया है जिसमें कैंसर मुक्ति के नाम पर लोगों को जमकर चूना लगाया जा रहा है।
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दिल्ली रोड स्थित फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज के सामने पहुंचेंगे तो कॉलेज के बाहर बड़ा बोर्ड लगा दिखाई देगा। कैंसर रिहेबिलिटेशन सेंटर के इस बोर्ड पर कॉलेज प्राचार्य डॉ. एमएफ रहमान का फोटो और फोन नंबर के साथ उनको सांइटिस्ट दर्शाया गया है। बोर्ड साफ साफ दर्शा रहा है कि कॉलेज में कैंसर मुक्ति का इलाज हो रहा है। कॉलेज के प्राचार्य खुद इस सेंटर का संचालन कर रहे हैं। प्राचार्य एमएफ रहमान के पास डिग्री तो पीएचडी की है। लेकिन पेशा मेडिकल डिग्री वाला अपना लिया है। पीएचडी डिग्री धारक कैसे कैंसर पीड़ितों को दवाई देकर उनकी जिंदगी बचाने का ख्वाब दिखा सकता है। 

प्राचार्य बोले, आ जाओ इलाज के लिए
फैज-ए-आम कॉलेज के प्राचार्य को मरीज बनकर फोन किया गया तो उन्होंने बेबाक कहा कि वह कॉलेज में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक बैठते हैं। उनके अलावा एक डिग्रीधारक डॉक्टर भी उनके साथ बैठता है। मरीज़ को 5 हज़ार रुपये महीना तक की दवाई दी जाती है। हालांकि उन्होंने डॉक्टर का नाम नहीं बताया। वहां पहुंचने पर डॉक्टर साहब का कहना था कि हमारे कॉलेज में कैंसर रिसर्च सेंटर खोला गया है। हम कैंसर के मरीज को दवाई नही देते। पहले केवल डाइट बदलकर ही मरीज का इलाज करते हैं।
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कैंसर
चार माह पूर्व करीमनगर निवासी इशरत जहां कैंसर के चलते पति शकील अहमद के साथ इस सेंटर पर पहुंची थीं। शकील ने बताया कि प्राचार्य रहमान ने कैंसर मुक्त करने की बात कहकर उन्हें दो हजार रुपये सप्ताह के हिसाब से दवाई दी। पत्नी को आग से पके किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से साफ मना किया। सही खुराक न मिलने से एक सप्ताह बाद ही इशरत की हालत और बिगड़ गई। 

इशरत को इसके बाद खरखौदा के फंफूडा में कैंसर के ऐसे ही सेंटर ले जाया गया था। जहां डॉ. डीपी श्रीवास्तव ने विदेश से 40 हज़ार रुपये में दवाई मंगाने की बात कहकर मरीज की जिंदगी 10 से 20 साल तक बढ़ जाने का हवाला दिया। जिदंगी की आस में परिजनों ने 40 हज़ार रुपये डॉक्टर को दे दिये। जिसके बाद ड्रिप के ज़रिये दवाई इशरत को दी गई। परिजनों ने दवाई के बारे में जानना चाहा तो डॉक्टर ने उन्हें फटकारकर चुप करा दिया। ड्रिप द्वारा दवाई चढ़ने के दो दिनों बाद ही इशरत की मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टर को फोन किया गया तो फोन नहीं उठा। इशरत के परिवार के लोगों का कहना है कि डॉ. रहमान के गलत इलाज से इशरत की हालत गंभीर हुई। इशरत की 5 बेटी और एक बेटा मां की याद में तडप रहे हैं। वहीं, फफूंडा के डॉ. को फोन किया गया तो उसने अपने क्लीनिक का नाम बताने से इंकार कर दिया।

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