मेरठ। कड़ाके की ठंड और तेज शीत लहर ने शहरवासियों की दिनचर्या के साथ-साथ सेहत को भी बुरी तरह झकझोर दिया है। ठिठुरन भरी सुबह, सिहराती रातें और बर्फीली हवाएं अब सिर्फ अलाव तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि लोगों के शरीर में छिपे पुराने दर्द को भी बाहर ले आई हैं। खासकर गठिया, बाय (साइटिका) और पुरानी चोटों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह मौसम किसी परीक्षा से कम नहीं है।
शहर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के कारण रक्त संचार धीमा पड़ जाता है और मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे पहले से मौजूद दर्द और ज्यादा गंभीर हो जाता है। कई मरीजों को पुरानी चोट वाली जगहों पर अचानक तेज टीस और असहनीय दर्द महसूस हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में पहले घायल रह चुके लोगों को भी ठंड के चलते दोबारा तकलीफ बढ़ गई है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एम.के. बंसल बताते हैं कि शीत लहर के दौरान पुरानी चोटें अक्सर उभरकर सामने आती हैं। कई मरीजों को रात में दर्द के कारण नींद तक नहीं आ पाती। ऐसे मरीजों को नियमित रूप से गर्म पानी की थैली या हॉट पैक का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे जोड़ों के आसपास रक्त प्रवाह बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। साथ ही शरीर को पूरी तरह गर्म कपड़ों से ढककर रखना बेहद जरूरी है।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. तनुराज सिरोही का कहना है कि ठंड में जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई कम हो जाती है, जिससे अकड़न और सूजन बढ़ती है। गठिया और बाय के मरीजों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयों में बदलाव या घरेलू प्रयोग नुकसानदायक हो सकते हैं।
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. योगेश अग्रवाल के अनुसार, शीत लहर का असर केवल जोड़ों तक सीमित नहीं रहता। इससे हृदय रोग, सांस की परेशानी और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को खास सतर्कता बरतने की जरूरत है। गर्म पेय पदार्थों का सेवन, घर के अंदर रहना, हल्की धूप में टहलना और नियमित हल्का व्यायाम इस मौसम में लाभदायक साबित हो सकता है।
अमर उजाला....सर्द मौसम में दिल्ली रोड से गुजरते लोग।- फोटो : रायबरेली में सलोन कस्बा स्थित औद्योगिक क्षेत्र।