मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के 661/6 के ध्वस्तीकरण के साथ ही बाजार स्ट्रीट की तरह क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी की जा रही है। कैंट विधायक की ओर से शासन को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। यदि शासन से इसकी स्वीकृति हो जाती है तो महायोजना में संशोधन किया जाएगा। आपत्ति, सुझाव के निस्तारण के बाद यह लागू होगी। माना जा रहा है कि इन सबमें भी कम से कम दो से तीन महीने का समय लग सकता है।में दो से तीन महीने का समय लगेगा।
शहर के सुनियोजित विकास के लिए मेरठ महायोजना-2031 बनकर लागू हो चुकी है। महायोजना-2021 करीब 500 वर्ग किमी. की थी जबकि महायोजना-2031 का क्षेत्रफल बढ़कर 1043 वर्ग किमी. हो गया है। नमो भारत रैपिड ट्रेन का संचालन भी मेरठ में शुरू हो चुका है। महायोजना के बाद एनसीआरटीसी की ओर से रैपिड कॉरीडोर के तहत दिल्ली और रुड़की रोड का जोनल प्लान तैयार हो गया है। इसमें नौ जोन का प्लान बनाकर आपत्ति व सुझाव का निस्तारण हो रहा है। सेंट्रल मार्केट को बाजार स्ट्रीट विकसित करने के लिए नई निर्माण नीति के तहत प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि नई नीति के तहत भी सड़कों की चौड़ाई का मानक बाजार के तहत पूरा नहीं हो रहा है। जानकारों का मानना है कि विशेष प्रक्रिया के तहत इसे बाजार बनाया जा सकता है।
नगर निगम-आवास विकास के विवाद का निस्तारण नहीं
नगर निगम की ओर से नई सड़क पर बनाए जा रहे दफ्तर में ही सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को दुकानें देने का ऐलान महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने किया है। सांसद अरुण गोविल व कैंट विधायक अमित अग्रवाल भी इसकी संभावनाएं तलाश रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि नई सड़क पर जिस जमीन पर नगर निगम ने दफ्तर बनाया है, उस पर आवास एवं विकास परिषद का दावा है। दोनों के बीच का विवाद शासन तक पहुंचा हुआ है। अभी इसका निस्तारण नहीं हुआ है।