क्या कहते हैं ग्रामीण
कासा पुट्ठी की मस्जिद के मौलवी मुसाहिद का कहना है कि एक तो गांव के लोग खुद हिम्मत नहीं करते और दूसरी तरफ गांव में पांचवी के बाद कोई स्कूल नहीं है। जिस कारण बेटियों की आगे की पढ़ाई नहीं हो पाती है।
- ग्रामीण आस मौहम्मद का कहना है कि गांव में पांचवीं के बाद स्कूल नहीं है, बेटियों को दूर भेजने से डर लगता है। गांव में ही शिक्षा का इंतजाम होना चाहिए।
- ग्रामीण मुन्ना का कहना है कि मजदूर आदमी अपना घर संभालेगा या बच्चों को पढ़ाए। गांव के लोग आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। पढ़ाई का इंतजाम गांव में होना चाहिए।
- अनीशा का कहना है कि माहौल खराब है, जिसके कारण बेटियों को घर से दूर भेजने से डर लगता है। यही वजह है गांव की लड़कियां पांचवीं के बाद नहीं पढ़ पाती।
क्या कहता है सिस्टम
कासा पुट्ठी में तैनात आशा कार्यकर्ता मेहराना, एएनएम वर्षा उज्जवल और आंगनवाड़ी रजनी का कहना है कि गांव के लोगों में जागरूकता नहीं हैं। यही कारण है कि यहां के लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
क्या कहते हैं प्रधान
मवी खुर्द और कासा पुट्ठी के प्रधान शोकिंद्र कुमार का कहना है कि ग्रामीणों को प्रेरित किया जाता है। लड़कियों को स्कूल भेजने के लिए कहा जाता है, लेकिन ग्रामीण जागरूक नहीं है। लोगों को और अधिक जागरूक किया जाएगा।
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