मेरठ। नए गृहकर का विवाद सुलझने की बजाय बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर नया गृहकर नहीं देंगे। निगम पहले स्वकर निर्धारण प्रपत्र शत-प्रतिशत लागू करें। निगम अफसरों की लापरवाही के चलते नए गृहकर पर बड़ा हंगामा हो सकता है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम का कहना है कि स्वकर प्रपत्र वितरित करने की योजना बनाई जा रही है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे द्वारा चिह्नित भवनों से नया गृहकर लेने में निगम योजना बना रहा हैं, जबकि भवन स्वामियों में निगम अफसरों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। दस गुना ज्यादा गृहकर के बिल जारी हो रहे हैं। लोगों का गुस्सा देखते हुए महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने नए गृहकर के बिल वितरित करने पर रोक लगा दी थी और स्वकर निर्धारण प्रपत्र प्रणाली शत-प्रतिशत लागू करने की बात कही। नगर निगम ने एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध करके डोर-टू-डोर स्वकर प्रपत्र वितरित करने की योजना बनाई। 15 दिन बीतने के बावजूद भी निगम कोई भी समाधान नहीं कराया पाया। इसको लेकर व्यापारियों में भी निगम के प्रति गुस्सा है। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता का कहना कि निगम की कार्यशैली को लेकर व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्वकर प्रपत्र प्रणाली लागू होने के बाद ही व्यापारी नया गृहकर देगा।