दिल्ली से अपहृत डॉक्टर के अपहरण की पूरी साजिश एक क्लिक में पढ़े, देखें तस्वीरें
Fri, 21 Jul 2017 09:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
सार
छह जुलाई को अपहरण के बाद मांगी गई थी पांच करोड़ की फिरौती, मास्टर माइंड अनुज समेत तीन की तलाश, देररात तक पुलिस देती रही दबिश, स्पेशल सेल दिल्ली पुलिस, एसटीएफ, मेरठ पुलिस की 24 से ज्यादा टीमें जुटीं, परतापुर में शताब्दीनगर स्थित मकान में बुधवार शाम आधा घंटा चली मुठभेड, 50 से ज्यादा राउंड फायरिंग, एक बदमाश को गोली लगी, मौके से घायल बदमाश समेत चार गिरफ्तार
दिल्ली से अपहृत डॉक्टर ए. श्रीकांत गौड़ को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एसटीएफ और मेरठ पुलिस की करीब दो दर्जन टीमों ने बुधवार शाम संयुक्त रूप से परतापुर के शताब्दीनगर स्थित एक मकान पर दबिश देकर मुक्त करा लिया। करीब आधा घंटा चली मुठभेड़ में दोनों तरफ से 50 से ज्यादा गोलियां चलीं। गोली लगने से घायल एक बदमाश और उसके तीन साथियों को मौके से दबोच लिया गया। दिल्ली पुलिस के एक सिपाही को भी गोली लगना बताया गया। बदमाशों से एक होटल में पुलिस पूछताछ में जुटी थी। पुलिस के मुताबिक आंध्र प्रदेश निवासी डॉ. ए. श्रीकांत गौड़ (29) दिल्ली में मेट्रो हार्ट एवं कैंसर अस्पताल प्रीत विहार में चिकित्सक हैं। जो गौतम नगर दिल्ली में रहते हैं। छह जुलाई को प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन से घर जाते समय बदमाशों ने उनका ओला कैब समेत अपहरण कर लिया था। बदमाशों ने ओला कैब कॉल सेंटर पर कॉल कर पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। अपहृत डॉक्टर के साथी डॉ. राकेश ने दिल्ली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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बुधवार शाम मेरठ में मौजूद दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों को बदमाशों की लोकेशन परतापुर के शताब्दी नगर के सेक्टर 4 बी में मिली। लोकेशन के आधार पर डीसीपी दिल्ली पुलिस, स्पेशल सेल, एसपी क्राइम मेरठ शिवराम यादव, एसटीएफ मेरठ और लोकल थाना पुलिस की करीब दो दर्जन टीमों ने धरना स्थल रोड स्थित सोहनवीर के मकान पर चौतरफा घेराबंदी कर दबिश दी। पुलिस के मुताबिक मकान का दरवाजा खुलते अंदर से फायरिंग शुरू हो गई। छत से भी पुलिस पर गोलियां बरसाई गई। पुलिस टीमों ने जवाबी फायरिंग की। जिसमें एक गोली प्रमोद नाम के बदमाश को लगी। इसके बाद बदमाशों के हौसले पस्त हो गए। पुलिस टीमों ने मकान में घुसकर घायल प्रमोद सहित चार बदमाशों को दबोच लिया। मकान के निचले हिस्से में रसोई के पास बने कमरे में बंधक बनाकर रखे गए चिकित्सक डॉ. श्रीकांत गौड़ को मुक्त करा लिया। पुलिस ने बदमाशों के पास से हथियार और कारतूस भी बरामद किए हैं। दिल्ली पुलिस मुठभेड़ के बाद बदमाशों को सीधे बागपत रोड स्थित एक होटल में लेकर चली गई। पुलिस की ओर से मुठभेड़ के बारे में अधिकृत जानकारी नहीं दी गई। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने इतना जरूर बताया कि मुठभेड़ के बाद चिकित्सक को मुक्त करा लिया गया है।
16 जुलाई को दौराला में हुई थी मुठभेड़
आरोपी सुशील
दिल्ली पुलिस ने चिकित्सक के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर ले रखा था। जिसमें एक नंबर दौराला क्षेत्र के दादरी गांव निवासी अनुज पुत्र सतबीर का ट्रेस हुआ था। 16 जुलाई को दिल्ली एसटीएफ और दिल्ली पुलिस इस नंबर की लोकेशन खतौली में मिलने पर वहां पहुंची थी। पुलिस ने सफेद वैगनार कार यूपी 15सीटी 2291 में सवार बदमाश अनुज का खतौली से पीछा शुरू किया था। एनएच-58 पर दौराला में सकौती फ्लाईओवर के पास यह बदमाश कार को कुदाकर जंगल में जा घुसा था। एक सप्ताह से दिल्ली पुलिस की एसटीएफ समेत 24 टीमें मेरठ में डेरा डाले हुए थीं।
मुठभेड़ के बाद पानी से बहाया खून
मुठभेड़ स्थल के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान अपहरणकर्ता के घर के बाहर खून ही खून बिखरा था। जिस पर पुलिस टीम ने पानी डाल दिया। लेकिन इसके बावजूद वहां काफी खून बह रहा था। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुठभेड़ कितनी जबर्दस्त थी।
वीडियो बनाकर भेज रहे थे
पुलिस सूत्रों की मानें तो आरोपी ओला कैब के सीईओ का नंबर कॉल सेंटर से मांग रहे थे। बदमाशों को उम्मीद थी कि अपने कस्टमर को छुड़ाने के लिए ओला कैब मोटी रकम दे सकती है। आरोपियों ने रुपये लेने के लिए ओला कैब पर पूरा दबाव भी बनाया हुआ था। इसके अलावा आरोपियों ने डॉ. श्रीकांत के ही नंबर से उसके वीडियो बना कर ओला कैब के कॉल सेंटर में भेज रहे थे। बदमाशों की डिमांड थी कि उन्हें नोट 2000 रुपये के नोट की शक्ल में ही मिले। ओला के कुछ अधिकारी पैसे लेकर मेरठ पहुंचे भी थे, लेकिन पांच सौ रुपये के नोट होने की बात कर आरोपियों ने उनके रुपये लौटा भी दिए थे।
मौका मिलता तो डॉक्टर को मेरठ से हटा देते बदमाश
आरोपी गौरव
डाक्टर को अपहरणकर्ताओं का गैंग मेरठ से लेकर सहारनपुर तक फैला हुआ था। दिल्ली पुलिस मेरठ में पहुंच चुकी थी तो ये लोग डाक्टर श्रीकांत को मुजफ्फरनगर या सहारनपुर शिफ्ट करने की तैयारी कर चुके थे। कांवड़ यात्रा के कारण मार्ग बंद होने और सुरक्षा मजबूत होने के कारण बदमाशों को प्लान फेल हो गया। मुठभेड़ के बाद यूपी और दिल्ली की पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि इस अपहरण के मास्टर माइंड दादरी गांव के अनुज, उसका भाई सुशील और गौरव बच निकलने मे कामयाब हो गये। देर रात तक तीनों की तलाश जारी थी। आधी रात के लगभग इनकी लोकेशन खतौली मिली थी। इसके बाद खतौली में कई ठिकानों पर दबिश दी गई। ये तीनों पहले भी मीरापुर में अपहरण की वारदात को अंजाम दे चुके हैं।
शताब्दीनगर के 112/4बी सोहनवीर पुत्र राम सिंह के मकान से मुठभेड के बाद पुलिस ने मकान मालिक सोहनवीर समेत चार बदमाशों को पकड़ा है। सोहनवीर मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। पकडे़ गए बदमाशों में अमित उर्फ बिल्लू पुत्र ओमप्रकाश गांव केडी, मुजफफरनगर, नेमपाल पुत्र जगमाल सिंह, गांव शब्बीर पुर सहारनपुर, प्रमोद पुत्र ब्रहम सिंह, रोहटा रोड सरधना शामिल हैं।
घटना वाले दिन कैब अनुज नामक बदमाश चला रहा था। कैब के लिए उसका पहला दिन था। आरोपी ने डॉक्टर को कार में बिठाया, कुछ दूर बाद ही उसके साथी भी कार में बैठ गए। डॉ.श्रीकांत को अगवा कर आरोपी मेरठ ले गए। वहां सुबह करीब 4.30 बजे ओला के कॉल सेंटर में कॉल कर फिरौती की रकम मांग ली। फिरौती की रकम के लिए बदमाश डाक्टर का वीडियो भेजकर धमका रहे थे।
आधे घंटे तक होती रही फायरिंग
आरोपी अनुज
परतापुर थाना क्षेत्र का शताब्दी नगर का सेक्टर 4 बी। शाम के छह बजे का वक्त। सोहनवीर के मकान के बाहर सफेद रंग की दो इनोवा आकर रुकती है। उसमें सवार पुलिस कर्मियों ने घरों के बाहर खडे़ लोगों को मकान के अंदर जाने को कहा और इसके बाद सोहनवीर के मकान को घेर लिया। सोहनवीर के पास रहने वाले सुभाष के अनुसार गाड़ी से लंबे लंबे 10-12 युवक निकले । वे जींस टीशर्ट और पेंट शर्ट पहने हुए थे। सभी के हाथ में पिस्टल थी। इनमें से दो तीन कांवड़ियों के भेष में भी थे। कार सवार हथियार बंद लोगों के कहने पर जैसे ही वह अपने मकान के अंदर गए ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज आनी शुरू हो गई। लोगों में दहशत हो गई। करीब आधा घंटा तक गोलियों की आवाज आती रही। मकान के अंदर से किसी के चीखने की आवाज आई। इसके बाद ये लोग मकान के अंदर घुस गई और तीन चार लोगों को पकड़कर ले गई। इनमें से एक कांवड़िया लग रहा था। इनमें से एक के पैर में गोली लगी थी। बाद में पता चला कि ये लोग पुलिस वाले थे।
गली में दौड़ दौड़ चला रहे थे गोली
मुठभेड़ स्थल के पास रहने वाले एक बच्चे ने बताया कि वह मकान की छत पर था। उसने देखा कि गली में कुछ अंकल भाग रहे हैं। उनके हाथ में गन है और वह भागते भागते भी गोलियां चला रहे थे। कई गोलियां चली। वह डर गया और नीचे चला गया।
मुठभेड़ के बीच फंसा बाइक सवार
मोहल्ले वालों ने बताया कि जिस वक्त मुठभेड़ चल रही थी, अचानक सेक्टर में ही रहने वाला एक युवक बाइक से वहां आ गया। उसे पुलिस कर्मियों ने पकड़ लिया। युवक के हाथ पांव फूल गए । पुलिस वाले उसे बाइक से उतारकर एक साइड में ले गए और उसकी काफी देर तलाशी ली। संतुष्ट होने के बाद पुलिस वालों ने घेराबंदी कर उसे गली से बाहर निकाला और कहा कि अभी दोबारा यहां मत आना।
हाथ पैर बांधकर बेड में रखा था डॉक्टर को
इसी कमरे में डाक्टर को बांध कर रखा था
बदमाशों ने दिल्ली के चिकित्सक ए. श्रीकांत गौड़ का अपहरण पूरी रेकी करने के बाद किया था। छह जुलाई को बदमाशों ने अपहरण किया था, उससे दो दिन पहले भी बदमाश अपहरण करने चाहते थे लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। उसके बाद बदमाशों ने डॉक्टर के पास काम करने वाले एक युवक का सहारा लिया। पुलिस की जांच में सामने आया कि बदमाशों ने डाक्टर को अपहरण कर नशीला पदार्थ सुंघाया था। उसके बाद हाथ पैर बांधे। मेरठ लाकर सोहनवीर के मकान की दूसरी मंजिल पर डॉक्टर को बंधक बनाकर बेड के अंदर रखा था। डॉक्टर की निगरानी में चार 24 घंटे रहते थे। पुलिस अफसरों ने बताया कि अपहरण कर भले ही बदमाश पांच करोड़ की फिरौती मांग रहे हों। लेकिन डॉक्टर दिल्ली में किराए के मकान में रहते हैं। डॉक्टर की संपत्ति को भी बदमाश आकलन नहीं कर सके। पुलिस का कहना है कि अपहरणकर्ताओं ने 13 दिन में 20 से अधिक कॉल की थी।
कौन हैं डॉक्टर श्रीकांत गौड़
मूलरूप से आंध्रप्रदेश के रहने वाले डॉ.श्रीकांत गौड़ अपने एक दोस्त के साथ गुर्जर डेरी, गौतम नगर, दिल्ली में रहते हैं। श्रीकांत प्रीत विहार स्थित मेट्रो हार्ट एवं कैंसर अस्पताल में डॉक्टर हैं। छह जुलाई को श्रीकांत ने प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के नीचे से घर जाने के लिए ओला कैब हायर की थी। अगले ही दिन कैब चालक के मोबाइल फोन से ओला कैब के कॉल सेंटर में पांच करोड़ रुपये फिरौती मांगने की कॉल पहुंची थी।
एक कॉल से अपहरणकर्ताओं तक पहुंची पुलिस
मेरठ में इस मकान में रखा गया था डाक्टर को
बागपत रोड स्थित एक होटल में रहकर दिल्ली पुलिस की टीम पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रही थी। कई संदिग्ध नंबरों को सर्विलांस पर लिया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार मंगलवार रात अपहरणकर्ता परतापुर तिराहे पर लगे एक कांवड़ शिविर में घूमने आए थे। यहां पर एक बदमाश ने अपना मोबाइल चालू करके कहीं बात की। पुलिस ने ये नंबर ट्रेस कर लिया। इसकी लोकेशन परतापुर गांव स्थित एक यूरिया गोदाम के पास मिली।
पुलिस को शक हुआ कि गोदाम के पास ही बदमाशों ने कहीं चिकित्सक को बंधक बनाकर रखा हुआ है। इस पर दिल्ली पुलिस की टीमों ने परतापुर पुलिस के साथ वहां घेराबंदी कर कई मकानों में दबिश दी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बुधवार शाम करीब तीन बजे ये मोबाइल फिर से ऑन हुआ। उसकी लोकेशन शताब्दी नगर के सेक्टर 4 बी की मिली। इसके बाद पुलिस सक्रिय हो गई। एक टीम सटीक लोकेशन पता करने में जुट गई। दिल्ली पुलिस ने अपने मुख्यालय सूचना देकर दिल्ली, शाहदरा आदि स्थानों से टीम बुला ली और मुठभेड़ के बाद श्री कांत को मुक्त कराया।
दस्तक देते ही की फायरिंग
पुलिस ने जिस मकान में दबिश दी। वह केवल 50 गज में बना था। मकान की दो मंजिल थी। पुलिस टीम ने जिस वक्त मकान में दबिश दी। मकान अंदर से बंद था। पुलिस ने जैसे ही मकान के दरवाजे से दस्तक दी। अंदर से फायर शुरू हो गए । पुलिस टीमों ने अपनी गाड़ी और दीवारों की ओट लेकर फायरिंग की। पुलिस की गोली एक बदमाश को लगने के बाद वह कुछ ढीले पड़े।
पत्नी बच्चे चले गए थे
मुठभेड़ स्थल के मोहल्ले वालों ने बताया कि सोहनवीर की छवि अच्छी नहीं है। वह प्रोपर्टी की खरीद फरोख्त का काम करता है। तीन चार साल पहले उसने यहां मकान खरीदा था। उसके तीन बेटियां हैं। करीब दो तीन महीने पहले उसकी पत्नी अपनी बेटियों को लेकर यहां से चली गई थी। अब वह अके ला ही यहां रहता है।
अपहरण केस में मेरठ पुलिस पूरी तरफ फेल साबित हुई। अपहरणकर्ता चिकित्सक को मेरठ में बंधक बनाकर रखे रहे लेकिन स्थानीय पुलिस को भनक तक नही लगी। 16 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने बदमाशों की लोकेशन दौराला में ट्रेस की थी। दिल्ली पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ हुई लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। बुधवार को भी दिल्ली पुलिस ने पूरी मुठभेड़ की पथकथा खुद लिखी और कार्रवाई को अंजाम दिया।
दिल्ली पुलिस की टीम बरामद चिकित्सक और पकडे़ गए बदमाशों को परतापुर थाने लाने की बजाय सीधे होटल गॉडविन में ले गई लेकिन तब भी स्थानीय पुलिस केवल मूक दर्शक बनी रही। इस तरह बदमाशों को होटल ले जाना दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। एसपी क्राइम से परतापुर थाने पर पूछा गया तो उन्होंने मामला दिल्ली पुलिस का बता दिया। कहा कि उनके स्तर से ही कार्रवाई हुई है। लोकल पुलिस ने सहयोग किया है। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने भी सिर्फ इतना बताया कि चिकित्सक की बरामदगी हुई है। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था मुठभेड़ की लिखा पढ़ी परतापुर थाने पर होगी लेकिन आधी रात के बाद तक भी दिल्ली पुलिस की टीम थाने पर नहीं आई थी।
एसएसपी मंजिल सैनी ने कहा कि दिल्ली पुलिस और मेरठ पुलिस ने डाक्टर को बरामद करने के लिए संयुक्त कार्रवाई की। शताब्दी नगर मे बदमाशों से मुठभेड़ के बाद डाक्टर का सकुशल बरामद कर लिया। जबाबी कार्रवाई में एक बदमाश को गोली लगी है। चार बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। फरार बदमाशों की तलाश में दबिश दी जा रही है। थाना परतापुर मे मामला दर्ज किया जाएगा।