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बालक को छोड़ पूरा परिवार था मूकबधिर, सांप ने बालक को भी नहीं बख्शा

Mon, 28 Aug 2017 07:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर
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सांप ने बालक को नहीं बख्शा
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बिजनौर में मौहल्ला कस्साबान में जहरीले सांप के काटने से एक सात वर्षीय बालक की मौत हो गई। कस्साबान के नफीस के संपूर्ण परिवार में मृतक समेत उसके दो पोते ही सामान्य थे जबकि उसका संपूर्ण परिवार मूकबधिर है। बच्चे के मूकबधिर दादा व पिता बच्चे को जीवनदान की लालसा में आसपास के कई गांवों में सांप के काटे का इलाज करने वालों की चौखट पर पहुंचे। हाथ जोड़कर इशारों में उसके मासूम बच्चे का इलाज कर उसकी जान बचा लेने की गुहार लगाई, परंतु सब तरफ से निराशा ही हाथ लगी। बालक की मौत पर परिजनों के साथ-साथ मौहल्लेवासी भी गमजदा है।                         
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कस्बे के मौहल्ला कस्साबान निवासी नफीस कुरैशी का नकटा नदी के किनारे घर है। घर के नाम पर मिट्टी की चाहरदीवारी के ऊपर लकड़ी व बांस के डंडों के सहारे प्लास्टिक की पन्नी पड़ी हुई है। नफीस के परिवार की गरीबी और लाचारी को छुपाये हुए है। नफीस के परिवार में पत्नी व चार बेटे व एक पुत्री है। नफीस समेत सभी परिवारजन मूकबधिर है। नफीस व उसका पुत्र हसीब मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। नफीस ने अपने मूकबधिर बड़े पुत्र हसीब की आठ वर्ष पूर्व शादी कर दी थी। हसीब के सबसे बड़ा पुत्र सात वर्षीय बिलाल व दूसरा पुत्र चार वर्ष का है। जब नफीस के मूकबधिर परिवार में दो बच्चे सामान्य पैदा हुए। ये बोल भी सकते है तो नफीस व उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे खुशी थी कि अब इन बच्चों को मोहताजगी की जिंदगी बसर नहीं करनी पड़ेगी। 
           
नफीस का परिवार बीती रात अपने झोपड़ीनुमा घर में सोया हुआ था। झोपड़ी के एक हिस्से में नफीस व उसकी पत्नी और चार बच्चे और झोपड़ी के दूसरे भाग में उसका बड़ा विवाहित पुत्र हसीब अपने परिवार के साथ सोया हुआ था। मध्यरात्रि में पास की नकटा नदी से आया सांप पिता हसीब के पास सोये सात वर्षीय बिलाल के ऊपर आ गिरा। सांप ने बिलाल के बाये कान व हाथ पर डसा तो बच्चे ने रोना शुरू कर दिया। बच्चे के जोर-जोर से रोने पर परिजन जाग गए। बच्चे ने अपने पिता व मूकबधिर परिजनों को इशारों में उसे सांप द्वारा डसे जाने की बात समझाई। सर्पदंश का शिकार हुए बालक के दादा ने टार्च की रोशनी में सांप को तलाशा तो सांप मूर्छित अवस्था में बच्चे की चारपाई के नीचे पड़ा मिला।
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सांप को मुंह की ओर से पकड़ा

बालक को सांप ने काटा
बालक के दादा नफीस ने हिम्मत का परिचय देते हुए अपने दोनों हाथों पर पॉलिथीन लपेटकर सांप को मुंह की ओर से पकड़कर पास में रखी प्लास्टिक की बाल्टी में डाल दिया। सर्पदंश से बालक पर बेहोशी छाने लगी। मध्य रात्रि के समय ही बालक के दादा व पिता स्थानीय एक निजी चिकित्सक के यहां ले गए। यहां पर बालक को मृत घोषित कर दिया गया। अपने बच्चे को किसी तरह बचा लेने की फिराक में बालक के मूकबधिर दादा नफीस व पिता हसीब बच्चे के शव को गोद में लिए क्षेत्र के गांव सरदारपुर छायली व रामजीवाला पहुंचे। वहां सांप के काटे का इलाज करने वालों से हाथ जोड़कर उसके बच्चे का इलाज कर उसको बचा लेने की गुहार लगाई। परंतु निराशा ही हाथ लगी। किसी ने बताया कि धामपुर के नींदड़ू में भी कोई व्यक्ति सांप के काटे का इलाज करता है तो बालक की ममता में दादा व पिता अपने बच्चे के शव को वहां लेकर गए। वहां भी असफलता ही हाथ लगी। मूकबधिर परिवार के सामान्य बालक बिलाल की सर्पदंश से हुई मौतस पर उसके परिवार के साथ-साथ मौहल्लेवासी भी गमजदा है। बालक को सोमवार को मगरिब की नमाज के बाद सपुर्देखाक कर दिया गया है।  

अपने मूकबधिर परिवार को खरीदारी कराता था मृतक 
सर्पदंश का शिकार हुए बिलाल (सात वर्ष) के परिवार में वह और उसका चार वर्षीय छोटा भाई ही सामान्य है, जबकि उसका संपूर्ण परिवार मुकबधिर है। जब किसी से मजदूरी और उसके काम-दाम की बात हो या बाजार से सामान खरीदारी की, हर जगह बिलाल के दादा नफीस व पिता हसीब बिलाल को ही अपने साथ रखते थे। बिलाल दुकानदार से सामान का भाव पताकर अपने मूकबधिर परिजनों को इशारों में समझाता। परिजन इशारों से सामान की कीमत में तब्दीली की मंशा बिलाल को बताते थे कि वह दुकानदार से ऐसा बोले। बिलाल का परिवार बेहद खरीबीजीवन गुजार रहा है। बोलता सहारा छीन जाने पर मूकबधिर परिवार बेहद गमजदा है और मौहल्लेवासी भी बालक की मौत और परिवार की बेबसी पर सदमे में है।

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