बिजनौर में मौहल्ला कस्साबान में जहरीले सांप के काटने से एक सात वर्षीय बालक की मौत हो गई। कस्साबान के नफीस के संपूर्ण परिवार में मृतक समेत उसके दो पोते ही सामान्य थे जबकि उसका संपूर्ण परिवार मूकबधिर है। बच्चे के मूकबधिर दादा व पिता बच्चे को जीवनदान की लालसा में आसपास के कई गांवों में सांप के काटे का इलाज करने वालों की चौखट पर पहुंचे। हाथ जोड़कर इशारों में उसके मासूम बच्चे का इलाज कर उसकी जान बचा लेने की गुहार लगाई, परंतु सब तरफ से निराशा ही हाथ लगी। बालक की मौत पर परिजनों के साथ-साथ मौहल्लेवासी भी गमजदा है।
कस्बे के मौहल्ला कस्साबान निवासी नफीस कुरैशी का नकटा नदी के किनारे घर है। घर के नाम पर मिट्टी की चाहरदीवारी के ऊपर लकड़ी व बांस के डंडों के सहारे प्लास्टिक की पन्नी पड़ी हुई है। नफीस के परिवार की गरीबी और लाचारी को छुपाये हुए है। नफीस के परिवार में पत्नी व चार बेटे व एक पुत्री है। नफीस समेत सभी परिवारजन मूकबधिर है। नफीस व उसका पुत्र हसीब मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। नफीस ने अपने मूकबधिर बड़े पुत्र हसीब की आठ वर्ष पूर्व शादी कर दी थी। हसीब के सबसे बड़ा पुत्र सात वर्षीय बिलाल व दूसरा पुत्र चार वर्ष का है। जब नफीस के मूकबधिर परिवार में दो बच्चे सामान्य पैदा हुए। ये बोल भी सकते है तो नफीस व उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे खुशी थी कि अब इन बच्चों को मोहताजगी की जिंदगी बसर नहीं करनी पड़ेगी।
नफीस का परिवार बीती रात अपने झोपड़ीनुमा घर में सोया हुआ था। झोपड़ी के एक हिस्से में नफीस व उसकी पत्नी और चार बच्चे और झोपड़ी के दूसरे भाग में उसका बड़ा विवाहित पुत्र हसीब अपने परिवार के साथ सोया हुआ था। मध्यरात्रि में पास की नकटा नदी से आया सांप पिता हसीब के पास सोये सात वर्षीय बिलाल के ऊपर आ गिरा। सांप ने बिलाल के बाये कान व हाथ पर डसा तो बच्चे ने रोना शुरू कर दिया। बच्चे के जोर-जोर से रोने पर परिजन जाग गए। बच्चे ने अपने पिता व मूकबधिर परिजनों को इशारों में उसे सांप द्वारा डसे जाने की बात समझाई। सर्पदंश का शिकार हुए बालक के दादा ने टार्च की रोशनी में सांप को तलाशा तो सांप मूर्छित अवस्था में बच्चे की चारपाई के नीचे पड़ा मिला।