खरखौदा। बिगड़ी व्यवस्थाओं के चलते किसानों की पर्ची समय से न आने व पिछले दिनों हुई बारिश से गेहूं की बुआई में किसान पिछड़ गए है। जिससे किसान चिंतित हैं। पहले क्षेत्र में कुछ रकबे में अगैती प्रजाति व अधिकतर हिस्से में सामान्य प्रजाति के गन्ना फसल की बुआई की जाती थी। जिसमें पहले व दूसरे सप्ताह में अगैती प्रजाति की पर्ची व तीसरे, चौथे, पांचवें व छठे सप्ताह में सामान्य प्रजाति की पर्ची जारी की जाती थी। लेकिन इस समय में किसान गन्ने की अगैती प्रजाति की बुआई बड़े पैमाने पर कर रहा है। अब किसान को प्रत्येक कैलेंडर में बराबर पर्चियां मिलती हैं। दिसंबर के अंत तक मिल को 33 प्रतिशत गन्ना मिल खरीद लेना चाहिए। लेकिन नगलामल गन्ना मिल ने अभी तक 25 प्रतिशत ही गन्ना खरीदा है। उधर दिसंबर का अंतिम सप्ताह चल रहा है। गेहूं की पछेती प्रजाति की बुआई भी दिसंबर तक ही की जाती है। वहीं पिछले दिनों हुई तेज बारिश से खेतों में भरे पानी ने गेहूं की बुआई को और भी पीछे धकेल दिया है। वहीं, खेतों में पानी होने के चलते गन्ने की छिलाई नहीं हो पा रही है। एक अनुमान के मुताबिक क्षेत्र में अभी 40 प्रतिशत गेहूं की बुआई नहीं हो सकी है। अब किसान दूसरा विकल्प खोजने लगे हैं।
तय 30 प्रतिशत गन्ना खरीदा जाएगा
क्षेत्र में रुक रुक कर जो बरसात हो रही है। इससे गन्ना क्रय केंद्रों से गन्ना उठाने में परेशानी आ रही है। लेकिन इसके बाद भी दिसंबर पूरा होने तक नगर मिल शुगर मिल करीब अपने रकबे का 30 प्रतिशत गन्ना खरीद लेगा। - जयवीर सिंह, कैन मैनेजर नगला शुगर मिल।
--------
सहकारी समितियों में नहीं गेहूं का बीज
- महंगे दामों पर बाजार से खरीद रहे पछेती फसल का बीज
माछरा। सहकारी खाद समितियों पर गेहूं का पछेती प्रजाति का बीज न होने के चलते दुकानों से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।
केन्द्र व प्रदेश सरकार जहां किसान को कम लागत पर दो गुना लाभ कराने के लिए योजना चला रही है वही दूसरी तरह किसान को गेहूं का बीज अनुदान पर मिलने में परेशानी आ रही है। माछरा ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत 9 सहकारी खाद वितरण की समितियां हैं जिन पर गेहूं की अगेती प्रजाति 2967 का बीज कुछ पर 10 क्विंटल और कुछ पर 8 क्विंटल बीज आया। लेकिन पछेती प्रजाति का कोई भी बीज सहकारी खाद समितियों पर नही आया है। जिसके चलते किसानों को बाहरी दुकानों से बीज महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। समितियों पर गेहूं का बीज 3300 रुपये कुंतल है जिसमें दो हजार रुपये का अनुदान किसानों के खाते में सरकार द्वारा देय हैं।
कृषक उत्तम, भूरे, आरिफ, सतवीर, आदि ने बताया कि सहकारी समितियों से उधार में बीज मिल जाता। परंतु सहकारी समितियों पर बीज न होने से बाजार में नगद रुपये देकर बीज खरीदना पड़ रहा है। सहकारी खाद समिति हसनपुर कलां के सचिव ने बताया कि पछेती प्रजाति का बीज नही आया है। अब गेहूं बुवाई का अंतिम समय चल रहा है अब बीज आने की उम्मीद कम है।