- किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा,
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे किनारे विकसित किए जा रहे औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना की वैधता समाप्त हो गई है। शासन द्वारा जारी इस अधिसूचना पर एक वर्ष बाद भी कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया गया। इस संबंध में धरनारत किसानों ने जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह को ज्ञापन सौंपा है।
शासन ने 24 मार्च 2025 को 291 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए प्रथम अधिसूचना जारी की थी। यह भूमि गांव छतरी, खड़खड़ी, गोविंदपुरी और खरखौदा के 800 किसानों की है। किसान अधिसूचना जारी होने से करीब 18 माह पहले से ही इसका विरोध कर रहे हैं। वह खरखौदा में छतरी मोड़ पर लगातार धरना दे रहे हैं। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण में 70 फीसदी किसानों की सहमति आवश्यक है। हालांकि, इस अधिग्रहण में एक भी किसान ने अपनी सहमति नहीं दी है। अधिसूचना का एक वर्ष पूरा होने के बाद भी शासन ने धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं की। अधिनियम की धारा 24 व 25 के तहत अधिसूचना की वैधता अब समाप्त हो गई है।
किसानों का कहना है कि नियम के अनुसार भूमि अधिग्रहण के लिए 70 फीसदी किसानों की सहमति अनिवार्य है। इस अधिग्रहण में किसी भी किसान ने अपनी सहमति नहीं दी है। वे करीब 18 माह से इस अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे हैं। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से दबाव आने पर शासन गुमराह करता है। शासन किसानों से लगातार वार्ता का हवाला देता है।