सहारनपुर। शेखपुरा गांव में जिस तरीके से यह बवाल हुआ है उसमें पुलिस से लेकर खुफिया विभाग भी फेल रहा है। गांव में शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने के बाद जैसे यह बवाल हुआ है उसके पीछे कई सवाल भी हैं। जिनके जवाब न केवल पुलिस, बल्कि आम जनता भी जानना चाहती है।
सवाल नंबर एक : पुलिस को जानकारी थी कि गांव में काफी संख्या में भीड़ है, जो ज्ञापन देना चाहती है। फिर भी अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था नहीं की गई। बवाल की सबसे बड़ी चूक यही रही।
सवाल नंबर दो : जिस समय ज्ञापन लिया गया उस समय भी करीब 500 से अधिक लोगों की भीड़ थी। फिर भी पुलिस गांव से ज्ञापन लेते ही इतनी जल्दी लौट गई। वहां पर किसी को तैनात नहीं किया गया। अगर वहां पर कोई तैनात होता तो गांव में युवाओं की भीड़ जमा होने पर पुलिस को पहले सूचना मिल सकती थी।
सवाल नंबर तीन : पथराव करने वालों में सभी युवा थे। आक्रोशित चेहरों को देखकर उनका मकसद ठीक तो नहीं लग रहा था। आखिर 10 से 15 मिनट के अंदर इतनी संख्या में युवा कैसे और कहां इकट्ठा हुए। यहां भी पुलिस और खुफिया विभाग का नेटवर्क फेल रहा।
सवाल नंबर चार : युवाओं की भीड़ को किसने उकसाकर पुलिस चौकी की तरफ भेजा। इस बवाल के पीछे किसका हाथ है, जिसने युवाओं को मोहरा बनाया और यह पूरा घटनाक्रम करा दिया।
सवाल नंबर पांच : गांव में इतनी अधिक भीड़ देखकर भी चौकी पर अतिरिक्त पुलिस बल नहीं बुलाया गया। आखिर पुलिस और खुफिया विभाग का नेटवर्क इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि उन्हें चंद कदमों की दूरी पर स्थित गांव में हो रही गतिविधियों का पता ही नहीं चला।
- प्रत्यक्षदर्शी बोले, एक पुलिसकर्मी था घायल
बवाल के दौरान वहां पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो एक पुलिसकर्मी के माथे पर पत्थर लगा था, जिससे खून भी निकला हुआ था। उधर, पुलिस देर रात तक यह कहती रही कि पुलिसकर्मियों पर पथराव हुआ है, लेकिन उसमें कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ।
- गांव में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
इस बवाल के बाद गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। जिनकी पहचान हो चुकी उनके यहां पर दबिश भी दी जा रही है। शाम के समय गांव का माहौल ऐसा था कि कोई भी चौक-चौराहे पर नजर नहीं आया। हर कोई अपने-अपने घरों में दिखाई दिया।