24 नवंबर 1946 को मेरठ के विक्टोरिया पार्क में नेहरू के हाथों फहराया गया तिरंगा हस्तिनापुर में अब भी सलामत
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर (मेरठ)। कस्बे की डिफेंस कॉलोनी में नागर परिवार 79 साल पुराने ऐतिहासिक खादी के तिरंगे की तीन पीढ़ियों से हिफाजत कर रहा है। इस तिरंगे को 24 नवंबर 1946 को मेरठ के विक्टोरिया पार्क में कांग्रेस के अंतिम अधिवेशन के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू ने फहराया था। अधिवेशन के बाद यह ध्वज कार्यक्रम संयोजक मेजर जनरल गणपत राम नागर को सौंपा गया था।
केसरगंज निवासी गणपत राम नागर का जन्म 16 अगस्त 1905 को पंडित विष्णु नागर के घर हुआ था। मेरठ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह विदेश गए और वर्ष 1929 में ब्रिटिश आर्मी में किंग अफसर के पद पर नियुक्त हुए। वर्ष 1939 में सिंगापुर के पतन के बाद वह आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें मेजर जनरल की जिम्मेदारी सौंपी थी। वह मलाया की थर्ड डिवीजन के कमांडर भी रहे। (संवाद)
चरखे वाला 9 गुणा 14 फीट का तिरंगा
नागर परिवार के पास सुरक्षित यह तिरंगा करीब 9 गुणा 14 फीट का है। इसमें वर्तमान तिरंगे के अशोक चक्र की जगह चरखे की छवि अंकित है। बताया जाता है कि अधिवेशन में पंडित नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, जेबी कृपलानी, सुचेता कृपलानी और आजाद हिंद फौज के कई अधिकारी मौजूद थे। अधिवेशन के समापन पर पंडित नेहरू और आईएनए के जनरल शाहनवाज खान ने ध्वज पर हस्ताक्षर किए थे।
तीन पीढ़ियों से विरासत की रक्षा
मेजर जनरल गणपत राम नागर के पौत्र गुरु नागर और देव नागर बताते हैं कि उनके दादा और पिता कर्नल सूरज नाथ नागर के बाद अब पूरा परिवार इस ऐतिहासिक धरोहर की देखभाल कर रहा है। परिवार का संकल्प है कि आने वाली पीढ़ियां भी इसे सुरक्षित रखेंगी।
आधुनिक तकनीक से संरक्षण
तिरंगे को नमी और सीलन से बचाने के लिए विशेष पैकिंग के साथ सिलिका जेल कैप्सूल का इस्तेमाल किया जाता है। इसे एयरटाइट तरीके से सुरक्षित रखा जाता है। परिवार के अनुसार करीब दो महीने में एक बार ध्वज को सावधानी से निकालकर नियंत्रित समय के लिए धूप दिखाई जाती है, ताकि कपड़े में नमी न रहे। इसके बाद उसे दोबारा सुरक्षित तरीके से पैक कर दिया जाता है।
विक्टोरिया पार्क में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा फहराये गए तिरंगे को दिखाते गुरु नागर स्रोत स्व
विक्टोरिया पार्क में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा फहराये गए तिरंगे को दिखाते गुरु नागर स्रोत स्व