दो दशक से ज्यादा समय से मुरैना फाटक पर कलिंग उत्कल समेत कई ट्रेनों को झंडी दिखाने वाले राजाराम के लिए उत्कल एक्सप्रेस का सफर अंतिम साबित हुआ। इस भीषण हादसे में राजाराम, उनकी पत्नी और बेटी की मौत हुई है। रविवार को उनके दामाद का मोर्चरी पर रो रोकर बुरा हाल था।
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के दुर्गा कालोनी निवासी राजाराम (55) रेलवे में गेटकीपर थे। उनकी ड्यूटी मुरैना फाटक पर ट्रेनों को झंडी दिखाकर पास कराने की थी। करीब एक साल पहले ही राजाराम ने वीआरएस ले लिया था। सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में स्नान करने का सपना था, तो वह पत्नी सुखदेवी (50) और बेटी आरती (12) के साथ कलिंग उत्कल एक्सप्रेस से हरिद्वार जा रहे थे। शनिवार शाम खतौली में उत्कल के दुर्घटनाग्रस्त होने पर यह दंपति और बेटी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सुखदेवी और आरती की शनिवार रात ही मुजफ्फरनगर अस्पताल में मौत हो गई थी जबकि मेडिकल अस्पताल मेरठ में भर्ती कराए गए राजाराम ने रविवार तड़के अंतिम सांस ली। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अजित चौधरी की सूचना पर पहुंची मेडिकल थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। रात करीब आठ बजे पुलिस ने राजाराम का शव उनके दामाद राजू व अन्य रिश्तेदारों की सुपुर्दगी में देकर एंबुलेंस से मुरैना के लिए भेज दिया।