दौराला - दौराला चीनी मिल क्षेत्र में गन्ने की फसल का निरीक्षण करते गन्ना वैज्ञानिक। स्रोत: स्वय
गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक एवं गन्ना वैज्ञानिक ने खेतों का दौरा कर किसानों को किया सचेत
दौराला मिल क्षेत्र के किसानों को बताए बचाव के उपाय
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। गन्ना फसल में चोटी बेधक (टॉप बोरर) कीट की दूसरी पीढ़ी का खतरा बढ़ने लगा है। इसे लेकर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक एवं गन्ना वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुशील ने दौराला चीनी मिल क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर फसलों का निरीक्षण किया और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी।
निरीक्षण के दौरान डॉ. सुशील ने बताया कि प्रदेश के कई इलाकों में टॉप बोरर की दूसरी पीढ़ी की तितलियां दिखाई देने लगी हैं। ऐसे में समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। संस्थान के वरिष्ठ एग्रोनॉमी वैज्ञानिक डॉ. त्रिपाठी ने किसानों को पेड़ी गन्ने की देखभाल और संतुलित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ फसल ही कीटों के प्रकोप को बेहतर तरीके से झेल सकती है।
वैज्ञानिकों की टीम ने गन्ना शोध फार्म पर किसानों को लाइट ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप वितरित किए। डॉ. सुशील ने किसानों को सलाह दी कि सीटीपीआर रसायन की 150 मिली मात्रा को 400 लीटर पानी में घोलकर जड़ों के पास ड्रेंचिंग करें और इसके बाद हल्की सिंचाई करें, जिससे दवा का प्रभाव बढ़ सके। मिल के वरिष्ठ प्रबंधक अभिषेक तोमर ने बताया कि किसानों को लाइट ट्रैप 40 प्रतिशत अनुदान पर और फेरोमोन ट्रैप निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गन्ना प्रबंधक डॉ. प्रणव राणा ने बताया कि संक्रमित कल्लों को काटकर खेत से बाहर नष्ट करें और 200 मिली टिल्ट (प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी) को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इस दौरान सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव प्रदीप कुमार, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक सुधीर सिंह आदि मौजूद रहे।