कामकाजी महिलाओं की तनावपूर्ण जिंदगी मातृत्व के अमृत को निगल रही है। इससे वे मातृत्व के सुखद अहसास से वंचित हो रही हैं। प्रसव के बाद छह माह तक स्तनपान न सिर्फ शिशु को कुपोषण से बचाता है, बल्कि यह अमृत उसकी हड्डियों को मजबूती रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है।
इस तरह बच्चे के संपूर्ण विकास की बुनियाद मां का दूध ही मजबूत करता है। लेकिन, कामकाजी महिलाओं का तनाव प्रसव के एक माह बाद ही उनसे स्तनपान का सुख छीन रहा है। कई मामलों में प्रसव के एक घंटे बाद ही स्तनपान में दिक्कत आ रही है। स्त्री रोग विशेषज्ञ इस बात की पुष्टि करती हैं। वे कहती हैं कि उनके पास रोजाना आने वाले स्तनपान से जुड़े मामलों में करीब 40 फीसदी ऐसे हैं, जिनमें एक माह बाद ही समस्या उत्पन्न हो जाती है।
तनाव के कारण हुए हार्मोन असंतुलित
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सपना अग्रवाल के मुताबिक, मां के मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्से हाइपोथेलेमस में पिट्यूट्री ग्लैंड होती है। इस ग्लैंड या ग्रंथि से प्रोलेक्टिन हार्मोन का सीक्रेशन होता है। इससे ही मां को दूध बनता है। इस हार्मोन का सीक्रेेशन तभी होगा, जब मां स्ट्रेस फ्री लाइफ में मातृत्व को महसूस करेगी। अब हो यह रहा है कि आजकल अधिकांश महिलाएं नौकरी-पेशा या एकल परिवार में हैं। सरकारी नौकरी के मुकाबले कॉरपोरेट या निजी कंपनियों में प्री और पोस्ट मैटरनिटी लीव भी इतनी नहीं मिलती। नौकरी में काम का तनाव, परिवार में अकेलेपन के कारण मां की पिट्यूट्री ग्लैंड में प्रोलेक्टिन का सीक्रेशन बंद हो जाता है। इससे दूध नहीं बनता। मां एक महीने से ज्यादा बच्चे को स्तनपान नहीं करा पाती। इससे बच्चों का विकास बाधित होता है।
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वर्ष-2011-12 के हाउस होल्ड सर्वे में भी आया सच
स्तनपान कुल शिशु ग्रामीण शिशु शहरी शिशु
जन्म से एक घंटे में स्तनपान का प्रतिशत 25.1 23.3 28.1
छह माह तक स्तनपान करने वाले शिशु 12.8 11.4 15.0
छह माह में स्तनपान के अलावा अन्य भोजन 80.7 81.7 79.1
ऐसे समझें सर्वे
- कुल 25 प्रतिशत शिशु ही जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कर पाते हैं
- जन्म से छह माह के बीच यह दर घटकर 12.8 फीसदी हो जाती है
- छह माह के बाद 80 फीसदी शिशु स्तनपान से वंचित हो जाते हैं
शोध में भी हुआ खुलासा
तीन साल पूर्व मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डॉ. प्रेरणा सिंघल ने शोध किया था। इसमें सूरजकुंड से लेकर मेडिकल कॉलेज के बीच विभिन्न कॉलोनियों की दो हजार से ज्यादा महिलाओं को शामिल कर स्तनपान की जागरूकता देखी गई। शोध में 55 फीसदी माताओं में दूध न बनना सामने आया। इनमें से 40 फीसदी माताएं कामकाजी थीं। सर्वे में इन महिलाओं ने प्रसव के दो माह बाद ही दूध न बनने की जानकारी दी थी।
एक्सपर्ट कमेंट्स
- कामकाजी महिलाएं स्तनपान के सुख से वंचित हो रही हैं। वे चाहकर भी बच्चे को फीड कराने में असमर्थ हैं। मेरे पास प्रतिदिन 10 से 12 महिलाएं दूध न बनने की शिकायत लाती हैं। वे स्तनपान करा सकें, इसके उपाय पूछती हैं। मिल्क मेकिंग में दवाएं भी लंबे समय तक कारगर नहीं हैं। माताएं डाइट में पानी, मेवे, मेथी, सतावरी और जीरा का सेवन करें, इससे लाभ मिलता है। गैलेक्टो गोग्स और गैलेक्ट ग्रेन्यूल का भी सेवन कर सकती हैं। -डॉ. सपना अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ
- नव प्रसूताओं में दूध न बनने की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ते तनाव के कारण माताओं में प्रोलेक्टिन हार्मोन का सिक्रेशन घटा है। इसके कारण दूध न बनने की शिकायत बहुत जल्दी बढ़ रही है। इसका असर माता और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। - डॉ. मनीषा तोमर, स्त्री रोग विशेषज्ञ