सरधना। विश्व भारती पब्लिक स्कूल छावनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत पांचवें दिन कथावाचक पंडित शिवम शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला प्रतीकात्मक है, जो मानव जीवन को आध्यात्मिक मार्ग पर ले जाने का संदेश देती है।
पंडित शिवम शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन की शुरुआत ईर्ष्या रूपी पूतना के वध से की। यह संदेश देता है कि जब तक मनुष्य अपने भीतर की ईर्ष्या को समाप्त नहीं करता, तब तक वह जीवन के वास्तविक मूल्यों की ओर नहीं बढ़ सकता। जैसे ही ईर्ष्या समाप्त होती है, शकटासुर रूपी लोभ का अंत होता है और फिर तृणावर्त रूपी सांसारिक इच्छाएं, जो मनुष्य को उसके कर्तव्यों से विमुख करती हैं, स्वतः नष्ट होने लगती हैं। हमारी जिव्हा (वाणी) का उपयोग यदि प्रेम, शांति और हित चिंतन के लिए किया जाए तो दैवीय संपदा प्राप्त होती है, अन्यथा क्रोध और कटु वचनों से दुख, क्लेश और विनाश जन्म लेता है।
कथावाचक ने कहा कि कर्म करने की स्वतंत्रता है, परंतु उसके फल भोगने की परतंत्रता है यही परमात्मा और प्रकृति का अटल विधान है। श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस मौके पर कमलेश, सावित्री, नेहा, अरुणा, अनिता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, पायल, ज्योति, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित, जयपाल, विनोद, जयकरण, बृजेंद्र, बिनोद, सुबोध, अंकित, रवि, राजकुमार, जितेंद्र, गोवर्धन उपस्थित रहे।