मेरठ। अमर उजाला के लगातार खबर प्रकाशित करने के चार महीने बाद आवास-विकास परिषद के अधिकारियों की नींद खुल गई है। शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहे में से एक तेजगढ़ी पर तीन मंजिला अवैध इमारत चार महीने में बनकर खड़ी हो गई, लेकिन अधिकारी नोटिस-नोटिस का खेल खेलते रहे। चार महीनेेे में निर्माणकर्ता नगेंद्रपाल सिंह ने तेजी से निर्माण कार्य पूरा कर लिया। इसके बाद आवास-विकास ने तेजी दिखाते हुए एमडीए को पत्र लिखकर संयुक्त तौर पर शनिवार को सीलिंग की कार्रवाई की। हालांकि, अभी इमारत में फिनिशिंग का कार्य काफी बचा हुआ है।
इस मामले में कई बार आवास-विकास परिषद में आरटीआई से भी जवाब मांगा गया। जिसमें आवास-विकास ने खुद इस निर्माण को अवैध माना। लेकिन उस समय अधीक्षण अभियंता रहे सतेंद्र कुमार पचौरी ने एक भी कार्रवाई निर्माणकर्ता के खिलाफ नहीं की। बल्कि सिर्फ नोटिस और काम बंद कराने का बहाना बनाते रहे। निर्माणकर्ता ने 17 फरवरी 2020 को भूतल, प्रथम तल, द्वितीय तल और तृतीय तल पर ममटी का निर्माण बताते हुए ऑनलाइन नक्शा स्वीकृत किया, लेकिन मौके पर इसे व्यावसायिक रूप से तैयार करते हुए स्वीकृत मानचित्र से अधिक निर्माण किया गया। इसके बाद आवास-विकास ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। वहीं, 11 सितंबर को निर्माणकर्ता के खिलाफ थाना मेडिकल में भी कानूूनी कार्रवाई के लिए तहरीर आवास-विकास की तरफ से दी गई लेकिन कोई भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी।
शासन की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उठा था मामला
हाल ही में पदभार संभालने वाले अधिशासी अभियंता नीरज कुमार ने शासन की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सीलिंग के अधिकार मांगे थे। इस पर एमडीए ने सीलिंग के अधिकार देने से मना कर दिया। इसके बाद खुद एमडीए के अधीक्षण अभियंता एके सिंह, जोनल अधिकारी जोन-डी विपिन कुमार और आवास विकास अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को सील किया। इस मौके पर अनिल बंसल, देवेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कब
हालांकि, अब एक और सवाल भी विभागीय अधिकारियों की तरफ खड़ा होता है। एक तरफ हाईकोर्ट ने शमन योजना स्थगित कर दी है। वहीं, इस निर्माण में जो अतिरिक्त निर्माण किया गया है तो उसका ध्वस्तीकरण कब किया जाएगा। ऐसे कई निर्माण अभी शास्त्रीनगर और जागृति विहार में इन्हें भी जल्द चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।