संदीप,,,, मेरठ साउथ रैपिड स्टेशन की पार्किंग के दाम बढ़े फोटो पाकिंर्ंग
शहर में नमो भारत और मेट्रो का पूरी तरह संचालन शुरू होने से पहले ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने यात्रियों को नए साल का कड़वा तोहफा दिया है। 1 जनवरी 2026 से मेरठ साउथ (परतापुर) सहित अन्य स्टेशनों पर पार्किंग शुल्क की नई दरें लागू कर दी गई हैं। इससे लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शुल्क बढ़ाने के साथ-साथ समय की सीमा भी घटा दी गई है जिससे दैनिक यात्रियों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। लोगों का कहना है कि अभी तो सफर शुरू भी नहीं हुआ और जेब कटनी शुरू हो गई।
पार्किंग स्थल पर काम करने वाले कर्मचारियों के अनुसार पहले 16 घंटे तक का एक स्लैब होता था लेकिन अब इसे घटाकर मात्र 6 घंटे कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अगर कोई नौकरीपेशा व्यक्ति सुबह 8 बजे गाड़ी खड़ी करता है और शाम 6 बजे लौटता है तो उसे अब कहीं ज्यादा भुगतान करना होगा। वहीं हेलमेट रखने के लिए यात्रियों को अलग से शुल्क देना होगा।
यात्रियों में भारी आक्रोश
शुक्रवार को मेरठ साउथ स्टेशन पहुंचे यात्रियों ने इन बढ़ी हुई दरों पर कड़ी नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि वे जाम से बचने के लिए रैपिड रेल का रुख कर रहे थे लेकिन पार्किंग के मनमाने दामों ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात कर रही है वहीं पार्किंग दरों में इस तरह की वृद्धि यात्रियों को हतोत्साहित कर रही है। मध्यम वर्गीय परिवारों और दिल्ली-मेरठ अप-डाउन करने वाले युवाओं के लिए यह खर्च अब भारी पड़ने लगा है। यात्रियों की मांग है कि मासिक पास की दरों को और कम किया जाए और समय सीमा में रियायत दी जाए।
रिठानी निवासी हेमंत सैनी ने बताया कि दिल्ली आने-जाने में पूरा दिन लग जाता है। नई दरों के हिसाब से रोजाना पार्किंग पर ही बड़ा हिस्सा खर्च हो जाएगा। एनसीआरटीसी को यात्रियों की सहूलियत देखनी चाहिए न कि बोझ डालना चाहिए।
मोहिउद्दीनपुर निवासी शुभम बैंसला का कहना है कि रैपिड से सफर आसान हुआ था लेकिन पार्किंग के दाम बढ़ाना गलत है। नौकरीपेशा लोगों की आय सीमित होती है ऐसे में यह वृद्धि उनकी जेब पर सीधा असर डालेगी।