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ईश्वर की उपासना का उद्देश्य आत्मोथान

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ईश्वर उपासना का उद्देश्य आत्मोत्थान
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महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म एवं बोधोत्सव मनाया
मेरठ। केन्द्रीय आर्य सभा के तत्वावधान में आयोजित महर्षि दयानंद सरस्वती जन्म एवं बोधोत्सव के दूसरे दिन का प्रात:कालीन कार्यक्रम मवाना रोड पर गंगानगर के राजेंद्रपुरम पार्क में संपन्न हुआ। सर्वप्रथम आचार्य वागीश्वर शास्त्री, राजेंद्र शास्त्री, दीपक शास्त्री, देव शर्मा के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ किया गया।
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कार्यक्रम में यजुर्वेद के 100 मंत्रों की विशेष आहुति प्रदान की गई। बिजनौर से पधारे आर्य जगत के प्रसिद्ध भजन उपदेशक पंडित योगेश दत्त ने मधुर आवाज में ईश वंदना एवं महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज पर किए गए उपकारों पर भजन सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आर्य विद्वान डॉ. सोमदेव जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन का सजीव वर्णन किया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में क्रांति लाई गई। महर्षि ने हमें ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को बताया तथा ईश्वर उपासना का उद्देश्य आत्मोत्थान एवं अपने आचरण को पवित्र करना है। संपूर्ण भारत को ही नहीं बल्कि विश्व को नई दिशा मिली। कार्यक्रम की अध्यक्षता सोहनवीर आर्य ने की तथा संचालन तेजवीर सिंह ने किया। कार्यक्रम में कें द्रीय आर्य सभा के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह चौधरी, राजेश सेठी, सुनील आर्य, मनोज आर्य, प्रमोद, तेजपाल सिंह, डॉ. आरसी मित्तल, केएस धामा, मुकेश आर्य, प्रीति सेठी, अपर्णा आदि उपस्थिति रहे।
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